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फ़लदार वृक्षों को काटने के बाद मौके से लकड़ी का हुआ परिवहन

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– कार्रवाई के नाम पर हुई शून्य स्थिति, एक दिन बाद भी नही पहुंचा वन अमला, प्रशासन भी मौन

राकेश गौर गैरतगंज रायसेन

गैरतगंज के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं रेस्ट हाउस में बिना अनुमति हरे भरे फ़लदार वृक्षों को काट जाने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अस्पताल में वृक्ष कटने के मामले में स्थानीय प्रशासन ने खंड चिकित्सा अधिकारी को नोटिस भेजा है तो वन अमला अभी तक मौके पर नही पहुंचा है। जिसके चलते हालात यह रहे कि काटे गए वृक्षों को मौके से बेख़ौफ़ परिवहन भी कर लिया गया। सूत्रों की माने तो पेड़ काटे जाने के बाद शुक्रवार की देर शाम उसकी लकड़ी एसडीएम कार्यालय गैरतगंज पहुंची तथा बाद में वह लकड़ी अन्यत्र स्थान पर भेजी गई। इस संबंध में एसडीएम रवीश श्रीवास्तव का कहना है कि पंचनामा बना लिया है, सोमवार को कार्रवाई करेंगे। उधर रेंजर  रजनीश शुक्ला का कहना है कि लकड़ी का परिवहन हो गया है तो शीघ्र ही कार्रवाई करेंगे। इस तरह की बयानबाजी केवल हो रही है तथा कार्रवाई के नाम पर शून्य स्थिति है
गौरतलब है कि नगर गैरतगंज के शासकीय परिसरों में खड़े वर्षों पुराने पेड़ो को बेवजह धड़ल्ले से काटा जा रहा है। सबसे पहले रेस्ट हाउस गैरतगंज में 4 विशाल पेड़ो को बेरहमी से काटा गया था। पेड़ किसके आदेश से काटे गए, यह कोई बताने को तैयार नहीं है। पता चला है कि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियो ने ही मौखिक आदेश देकर उन्हें कटवा दिया है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी प्रशासनिक अधिकारियों की मौखिक अनुमति से ही पेड़ो की बलि दी गई है। तभी तो इतने बड़े दो मामलों के बाद भी प्रशासन कार्रवाई करने के स्थान पर सुस्ती दिखा रहा है। तथा पूरा मामला संदेह के घेरे में तथा जांच करने योग्य है। देखना यह है कि अधिकारियों की मौन सहमति से हुए इस गलत कार्य में जिला कलेक्टर क्या संज्ञान लेते हैं और क्या कार्रवाई होती है।


विशेषज्ञों की राय – फ़लदार वृक्ष काटे जाने की नही दी जा सकती अनुमति

हरे भरे फ़लदार वृक्षो को काटे जाने की अनुमति नही दी जा सकती है। चाहे कोई भी परिस्थिति क्यो न हो। यदि विशेष परिस्थितियां बनती है तो वरिष्ठ कार्यालय से ही प्रक्रिया प्रारंभ होती है। यह बात वन विभाग में तैनात विशेषज्ञों से चर्चा में पता चली है। उन्होंने हमें यह भी बताया कि फ़लदार वृक्ष काटना किसी की निर्मम हत्या करने के बराबर होता है, जिसका दंड भी उसी तरह का होता है। उन्होंने बताया कि किसी भी वृक्ष को काटे जाने की अनुमति के लिए बहुत सी शर्ते होती है। जिनमे पेड़ काटे जाने के बाद दूसरी जगह पौधरोपण करना, उसकी देखभाल करना सहित अन्य नियम हैं।

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