संसार में सुख शांति एवं प्रेम का प्रसार करने रामचरितमानस का अनुशीलन परम आवश्यक है- आचार्य सुरेंद्र स्थापक
उदयपुरा रायसेन । श्री रामचरितमानस सम्मेलन समिति पचमा के तत्वाधान में आयोजित मानस सम्मेलन में मानस प्रवक्ताओं द्वारा मानस ग्रंथ के माध्यम से व्यक्ति में प्रेम, करुणा एवं परोपकार के साथ, आत्म कल्याण, हेतु संस्कार जागृति हेतु चिंतन, मनन किया जा रहा है, मानस आचार्य सुरेंद्र स्थापक ने सुंदरकांड की व्याख्या करते हुए बताया कि श्री हनुमान जी का प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य सेवक का संबंध है ,वह अनुकरणीय है ,भक्त हनुमान शक्तिशाली, अन्याय और अत्याचार के पर्याय रावण के नगर लंका में जाकर भय रहित होकर प्रभु श्री राम के शांति, सदाचार एवं न्याय के संदेश को रखते हैं आपने बताया कि धैर्य और धीरज ऐसे संस्कार हैं, जिनसे अन्याय और अत्याचार का मुकाबला करके सफलता प्राप्त की जा सकती है, मनुष्य को किसी भी परिस्थिति में उत्तम आचरण का त्याग नहीं करना चाहिए, मानस प्रवचन श्रृंखला में राष्ट्रीय मानस प्रवक्ता रामनरेश शास्त्री, एवं सचिन कृष्ण शास्त्री ने भी अपनी सुमधुर संगीतमय मानस शैली से सुंदरतम व्याख्यान प्रस्तुत किए
मानस ग्रंथ के पूजन में पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा अपने परिवार सहित उपस्थित होकर सत्संग श्रवण कर मानस प्रवक्ताओं का आशीर्वाद प्राप्त किया