देवेंद्र तिवारी सांची रायसेन
वैसे तो इस स्थल की नगर परिषद समय समय पर सुर्खियों में आती रही है इस स्थल की नगर परिषद पूर्ण बहुमत से भाजपा की बागडोर सम्हाले हुए हैं । विधानसभा चुनाव में भाजपा एक बार फिर सांची विधानसभा क्षेत्र पर काबिज होने की कवायद में जुटी हुई है परन्तु इस स्थल की परिषद ने अपनी ही पार्टी की जीत के मंसूबों पर पानी फेरने का मन बना लिया है । मुख्यमंत्री विधानसभा चुनाव को देखते हुए जहां कर्मचारियों को अपने पक्ष में करने रोज नित नई घोषणाएं कर रहे हैं तथा कर्मचारियों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए निपटारा करते हुए उनकी मांगों को पूरा करने की कवायद में जुटे हुए हैं तो वहीं दूसरी ओर उन्ही की पार्टी की परिषद उनके मंसूबों पर पानी फेरते हुए वर्षों से सेवा दे रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा कर बेरोजगारी की कगार पर ला खड़ा कर रही है ।दो माह बीतने के बाद भी कर्मचारियों का न तो प्रशासन न स्वयं परिषद ही कोई निर्णय कर पा रही है कर्मचारियों को दर दर भटकना पड़ रहा है ।
जानकारी की अनुसार नगर परिषद दस पंद्रह सालों से दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कर्मचारी अपनी सेवाएं देते चले आ रहे थे परन्तु इस परिषद के सत्ता सम्हालते ही इसके निशाने पर दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी आ गये तथा इन कर्मचारियों को बेरोजगार करने की कवायद शुरू हो गई । जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को गंभीरता से लेते हुए उनकी मांगों को पूरा कर रहे हैं । परन्तु परिषद मुख्यमंत्री के मंसूबों पर पानी फेरने में पीछे नहीं दिखाई दे रही है।
पूर्ण बहुमत की परिषद बनी
इस स्थल पर लगभग चार साल बाद इस परिषद का चुनाव हुआ तब भाजपा ने पंद्रह वार्डों में से 12 वार्डों पर कब्जा जमाते हुए बहुमत हासिल कर लिया तथा 2 पार्षद निर्दलीय रूप से जो भाजपा समर्थक माने जाते हैं विजय प्राप्त कर ली। जबकि पूर्व में कांग्रेस की परिषद हुआ करती थी । इस बार डा प्रभूराम चौधरी के कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होने पर अधिकांश कांग्रेस कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हो गए थे तब इस स्थल से कांग्रेस का लगभग पूरी तरह सफाया हो गया ।तब कांग्रेस के हाथ मात्र एक ही पार्षद आया ।
अध्यक्ष के निर्वाचन के साथ बढ़ी बीजेपी में दरार।
बीजेपी ने बड़े जोर शोर से परिषद में परचम लहराने का जोरशोर से जश्न मनाया था तथा अध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू हुई तब बताया जाता है कि प्रदेश भाजपा ने अध्यक्ष पद पर भाजपा के पुराने नेता तथा नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष वार्ड नं 1 से नवनिर्वाचित बलराम मालवीय के नाम पर अपनी मोहर लगा दी । परन्तु कांग्रेस से आये भाजपा में शामिल डा प्रभूराम चौधरी के काफी करीबी माने जाने वाले पप्पू रेवाराम ने भी पार्टी के नामांकित पार्षद को दरकिनार करते हुए अध्यक्ष बनने का दावा ठोक दिया तब भाजपा में ही आपस की दावेदारी को देखते हुए निर्वाचन अधिकारी को अध्यक्ष पद का चुनाव करवाना पड़ा तब चुनाव में बलराम मालवीय एवं पप्पू रेवाराम के बीच पंद्रह पार्षद वाली परिषद में कडा मुकाबला हुआ तथा कांग्रेस के एक मात्र कांग्रेस पार्षद ने भी अपने ही परिवार के श्री रेवाराम केपक्ष में मतदान किया।तथा दोनों ही दावेदार बराबर मत हासिल कर सकें तब ऐसी स्थिति में निर्वाचन अधिकारी को पर्ची माध्यम से अध्यक्ष चुनाव प्रक्रिया अपनानी पडी तब श्री रेवाराम के नाम की पर्ची उठी तब अध्यक्ष पप्पू रेवाराम के निर्वाचित होने की घोषणा की गई। इस निर्वाचन के साथ ही भाजपा के नये पुराने की खाई और गहरा गई ।तब से ही परिषद दो धड़ों में बंटी दिखाई देने लगी ।
आपसी गुटबाजी के चलते परिषद में सड़क निर्माण एवं तीन कर्मचारी हटाने का मुद्दा गरमाया।
बसस्टेंड मुख्यमंत्री कायाकल्प योजनाकी सड़क एवं कर्मचारियों को हटाने का प्रस्ताव पारित हुआ।उस समय हुई परिषद की बैठक में बसस्टेंड पहुंच मार्ग निर्माण हेतु मुख्यमंत्री विशेष कायाकल्प अभियान अंतर्गत लगभग 49 लाख रुपए की राशि से निर्मित सड़क को परिषद ने अस्वीकृत करते हुए इस राशि को सभी वार्डों में विकास के लिए बराबर बांटने का प्रस्ताव पारित किया । तथा तीन दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को हटाने का प्रस्ताव पारित किया गया बताया जाता है कि इस पारित प्रस्ताव में रात्रि में तत्कालीन सीएमओ एवं स्थापना लिपिक द्वारा कांट-छांट की गई थी तब इन प्रस्तावों को लेकर मामला नगरीय प्रशासन विभाग आयुक्त एवं कलेक्टर तक पहुंच गया तब कलेक्टर ने अपनी जांच करवाई तथा उक्त प्रस्ताव में छेड़खानी को सत्य पाते हुए प्रस्ताव निरस्त करने एवं सड़क निर्माण तथा हटाये कर्मचारियों को सेवा में रखने के आदेश दिए तब पुनः सड़क निर्माण को लेकर परिषद ने कलेक्टर के आदेश को भी नकार दिया जबकि कर्मचारियों को काम पर ले लिया गया । परन्तु प्रस्ताव में हेर-फेर करने के मामले में उक्त लिप्त अधिकारी कर्मचारी की मजबूत राजनीतिक पकड़ के चलते कार्यवाही टांय-टांय फिश होकर रह गई तथा उस कार्यवाही को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। परन्तु गड़बड़ी करने वाले बच कर रह गये । जिसका खामियाजा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारीयों को लगभग एक महीने के भुगतान से हाथ धोना पड़ा।

कांग्रेस ने की अध्यक्ष की तानाशाही के विरुद्ध नारेबाजी
कांग्रेस वार्ड पार्षद जिसमें स्वयं नगर परिषद अध्यक्ष निवास करते हैं वार्ड में विकास न होने को लेकर धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी तथा भेदभाव को लेकर कांग्रेस ने पार्षद के साथ रैली निकाली तथा अध्यक्ष की तानाशाही के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए नगर परिषद पहुंचे जहां सीएमओ के आश्वासन पर मामला शांत हुआ कांग्रेस पार्षद ने भी अपना समर्थन अध्यक्ष श्री रेवाराम को दिया था इस समर्थन के बदले कांग्रेस पार्षद को पीआईसी में जगह मिल गई थी परन्तु अध्यक्ष के विरुद्ध रेली निकालने पर कांग्रेस पार्षद को भी पीआईसी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया ।
तीसरी बार की परिषद बैठक में फिर दस कर्मचारियों को काम से किया बाहर
बताया जाता है कि तीसरी बार परिषद की बैठक आयोजित कर दस दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया । इस बार की विशेषता यह रही कि मप्र भर के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे उसी तर्ज़ पर नगर परिषद सांची के कर्मचारी भी सभी स्थाई कर्मचारियों के साथ दैनिक वेतनभोगी अपनी वियनिमितिकरण एवं ईपीएफ की वेतन से कटौती की गई राशि जमा करने को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। हालांकि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद सभी कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने का निर्णय लिया था तथा परिषद ने भी आपात बैठक आयोजित कर प्रस्ताव पारित करते हुए कर्मचारियों को हड़ताल खत्म करने तथा काम पर लौटने चेतावनी पत्र दिया था बताया जाता है तब 22 कर्मचारियों को काम पर वापस बुला लिया गया तथा दस कर्मचारियों को काम पर लेने से इंकार कर दिया ।
इसमें सबसे बड़ी बात यहां देखने को यह मिल रही है कि दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को किसी भी प्रकार का न तो सेवा से पृथक करने का नोटिस ही दिया गया न ही काम पर लौटने का नोटिस दिया जा सका। तथा इस मामले में कर्मचारियों ने बताया कि नगर परिषद प्रशासन द्वारा हमें काम पर लौटने का आदेश नहीं दिया गया तथा हमसे मौखिक रूप से कहा गया कि तुम लोगों द्वारा परिषद के आदेश का पालन नहीं किया गया जिससे दस लोगों को सेवा से पृथक कर दिया गया है । कर्मचारियों ने बताया कि इस दशा में हमें न तो कार्य आदेश दिया गया न ही सेवा से पृथक करने का ही कोई आदेश दिया गया ।
कर्मचारियों का कहना है कि हमनें बरसों सेवा दी है तथा कोराना समय में भी हमने अपनी जान की बाजी लगाकर हर आदेश का पालन किया है अब हमें न तो प्रशासन कार्य आदेश दे रहा है तथा न ही हमें सेवा से पृथक करने का आदेश ही दिया जा रहा है। जिससे हम लोग अपने पालन-पोषण की अन्य रोजी रोटी तलाश कर सकें । एवं हम लोगों को अधर में लटका कर रखा गया है बताया जाता है कि इन कर्मचारियों को लगभग सात पार्षद हस्ताक्षर युक्त आवेदन लेकर कलेक्टर को अवगत कराने का मन बना चुके हैं इन पार्षदों का कहना है कि या तो सभी हड़ताली कर्मचारियों को काम से बाहर किया जाये अथवा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी जिन्हें काम पर नहीं लिया गया है उन्हें भी काम पर वापस लिया जाए । बताया तो यहां तक जा रहा है कि अब परिषद में नये कर्मचारियों की भर्ती की चर्चा भी सुनाई दे रही है जबकि दस पंद्रह साल पुराने कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ तथा कर्मचारियों की न ई भर्ती को लेकर भी नगर में चर्चा गरम हो गई है चर्चा तो यहां तक चल पड़ी है कि अब जिम्मेदार भर्ती के नाम पर मोटी कमाई करने की जुगत भिड़ा रहे हैं । बहरहाल परिषद प्रशासन न तो कर्मचारियों को सेवा से पृथक करने नोटिस ही दे पा रहे हैं न ही नौकरी में लेने को ही तैयार दिख रहे हैं हालांकि कर्मचारियों ने बताया कि हमने नायब तहसीलदार को भी इस मामले को लेकर ज्ञापन सौंपा था परन्तु वहां से भी कुछ हद नहीं निकल सका इसके बाद कलेक्टर को भी आवेदन दिया गया है परन्तु वहां से भी आश्वासन तो दिया गया परन्तु लंबे समय बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया जा सका जिससे हम कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ रही है ।