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खाने के लिये नहीं जीते, जीने के लिये खाते हैं मेंदा, शक्कर, नमक,जर्सी गाय का दूध,पालिस किया चाँवल सफ़ेद जहर है -आचार्य श्री विद्यासागर महाराज

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सुरेन्द्र जैन रायपुर

संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ससंघ चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में विराजमान है | आज के प्रवचन में आचार्य श्री ने बताया कि यहाँ चतुर्थ काल को सतयुग कहते हैं | उस समय से आचार्य परंपरा आज तक चलते आ रही है | संसार में परिवर्तन होते रहते हैं | इन परिवर्तनों को यथासंभव स्वीकार किया जा सकता है | उन्हें स्वीकार करें यह नियम नहीं है | आज भी सरकार इस उलझन में पड़ी है कि इसके लिए आप लोगो को भी विवेचना के लिए दे देना चाहिए | 15 से 20 वर्ष पूर्व आपके चौके में बिना धुवां और फुकनी के भोजन तैयार किया जाता था जिसे गैस कहते हैं | बहुत कम लोग इस गैस का प्रयोग करते थे जो देखने में भी कम उपलब्ध होता था | अधिकतर लोग चूल्हे या सिगड़ी में ही भोजन पकाते थे | हमने उस समय कहा था कि अग्नि का अस्तित्व पंचम काल के अंत तक रहेगा किन्तु अग्नि का यदि आप उपयोग नहीं करते हैं तो सचित्त होने के कारण वह वनस्पति या धान्य लेने योग्य नहीं है | जैसे लौकी को आप सिधे मुह में डालकर नहीं खा सकते उसे खाने के लिये प्रासुक या पकाना अनिवार्य है | ककड़ी वगैरह ले लेते हैं वह बात अलग है | रत्नकरंड श्रावकाचार एवं मूलाचार में “अनग्य पक्कम” लिखा है अर्थात जो वनस्पति या धान्य अग्नि में पका हुआ नहीं है वह खाने योग्य नहीं है | ज्वार, धान आदि कि लाई या मुरमुरा बनाया जाता है वह अलग है | चाँवल, बाजरा आदि को कच्चा नहीं खाया जा सकता वह अभक्ष्य है उसे पचा नहीं सकते | अमेरिका जैसे राष्ट्र के द्वारा यह रिसर्च किया गया है कि गैस में जो रोटी बनाते हैं उसकी लौ से रोटी जब स्पर्श होती है तो वह विषाक्त हो जाती है जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो रही है | 10 से 20 वर्ष पूर्व कुछ महाराजों ने कहा था कि वे सिगड़ी में बना भोजन ही लेंगे और आज भी ऐसे महाराज देखने को मिलते हैं | हमने उस समय सोचा था कि ऐसा नियम बनायेंगे तो महाराजों ने कहा था कि ऐसे में आगे कैसे बढ़ेंगे कई प्रकार के आविष्कार हो रहे हैं लेकिन आप जब बोलेंगे कि मन शुद्धि, वचन शुद्धि, काय शुद्धि, आहार जल शुद्ध है तो यह प्रश्न तो उठ ही गया कि रोटी शुद्ध है क्या ? यह व्यापक प्रश्न है देश तो क्या विदेश तक पहुच गया है इसका कोई विकल्प आएगा जरुर लेकिन जब तक इस मन शुद्धि, वचन शुद्धि, काय शुद्धि, आहार जल शुद्ध है का क्या होगा ? भोजन शुद्ध है कह दिया जाता है लेकिन इससे कैंसर जैसा रोग हो सकता है | एक लेख में आया था कि २०२३ से २०२५ तक हर घर में एक व्यक्ति असाध्य रोग से ग्रसित होगा | यह गैस पुरे विश्व में ऐसे फैल गया है जसे नल से पानी आता है वैसे ही नल से गैस आ रही है | यदि छोटे बच्चे को गैस में बनी विषाक्त रोटी दोगे तो उसे कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है | बहुत से लोग हमारे पास आते हैं और कहते हैं कि महाराज मेरा एक २५ वर्ष का लाडला बेटा है जिसकी अभी – अभी शादि हुई है उसे कैंसर हो गया है | रोते हैं, बिलखते हैं कि अब हमारे परिवार का क्या होगा ? इसलिए वर्षों पूर्व आचार्यों ने जिनवाणी में हमारे लिये लिखा है कि पानी छान कर पीना और आज नल से पानी आया उसे छानने कि कोई आवश्यकता नहीं है आज साइंस कहता है उसके सामने हम साइलेंस हो जायेंगे आप इसका हवाला दोगे तो हम कुछ बोल नहीं पायेंगे | इसके लिये हम तो “बोलेंगे क्या दहाढेंगे” क्योंकि व्रत, नियम, संयम पालन करने का सवाल है | इसलिए आप लोग अभी से सजक हो जाओ | अमेरिका जैसा देश कह रहा है कि गेहूं के बने मैदे से हार्ट, किडनी, लीवर, सुगर जैसी गंभीर बीमारी हो रही है क्योंकि गेहूं का मैदा भीतर जाकर चिपक जाता है और वहाँ जगह बना लेता है और जिसके निकलने का कोई रास्ता है ही नहीं यदि ऑपरेशन से निकालते भी है तो वह पुनः वही काम करेगा | उनका कहना है कि बाजरा, मक्का, ज्वार, जौं, रागी, चना, अरहर, मुंग, उड़द ये भारतीय बीज है | गेहूं को उन्होंने भारतीय बीज नहीं माना लेकिन पुराना तो है | अमेरिका से भारत के लिये खुलमखुला पत्र आया है कि भारत में 80 प्रतिशत लोग गेहूं का उपयोग रोटी बनाने के लिये करते हैं | मैदा, शक्कर, नमक, जर्सी गाय का दूध, पौलिस किया चावल ये सफ़ेद जहर हैं जिसे खाकर आप लोग सफ़ेद हो रहे हो और आपके शरीर कि लालिमा गायब हो रही है | हम “खाने के लिये नहीं जीते, जीने के लिये खाते हैं |” राजस्थान में बाजरा का खिचडा बनता है, कर्णाटक में ज्वार, मक्का, चना कि ही रोटी मिलेगी क्योंकि इसी के माध्यम से जीवन यापन करना है और धर्म ध्यान करना है नहीं तो अकाल ही मरण हो जायेगा और अपनी पूरी आयु जी नहीं पायेगा | राजस्थान में कहा भी जाता है –

“बलिहारी गुरु बाजरा, तेरी लम्बी पान |

घोड़े को तो पंख लगे, बुढे हुए जवान||”

यहाँ बाजरा को गुरु कहा, तुम्हारे जो लम्बे हाथ पैर है | घोडा यदि खा ले तो उसको पंख लग जाता है और अनुपात में खाने से उम्र पूरी होती है | यह विषय आगम के अनुसार ही रखा है बाकी आप लोग इसे समझकर अपने खान – पान को सुव्यवस्थित कर लें | यहाँ बहुत दूर दूर से लोग आ रहे हैं भारत के सभी राज्यों से राजस्थान, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मणिपुर मध्य प्रदेश आदि लेकिन कश्मीर के लोग अभी तक नहीं आये हैं | शासन कि व्यवस्था चल रही है ताकि कश्मीर के लोगों को भी यहाँ के धर्म सभा में सम्मिलित होने का मौका मिल जाये | आज आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को नवधा भक्ति पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य गीदम वाले सिंघई गुलाबचंद श्रीमति शशिप्रभा जैन आशीष जैन खेमचंद जैन सुरेन्द्र जैन मिली जैन मानसी श्रुति सुहानी जैन बाड़ी वाले, निर्देश जैन बबिता जैन हरषु प्रिंशु जैन बेगमगंज वाले निवासी सांकर निको धरसीवा रायपुर छत्तीसगढ़ ,एवं संजय जैन मंजू जैन खुशी राजा जैन मड़ावरा ललितपुर परिवार को प्राप्त हुआ | जिसके लिये चंद्रगिरी ट्रस्ट के अध्यक्ष सेठ सिंघई किशोर जैन,कार्यकारी अध्यक्ष श्री विनोद बडजात्या, सुभाष चन्द जैन,निर्मल जैन, चंद्रकांत जैन,मनोज जैन, सिंघई निखिल जैन (ट्रस्टी),निशांत जैन (सोनू), प्रतिभास्थली के अध्यक्ष श्री प्रकाश जैन (पप्पू भैया), श्री सप्रेम जैन (संयुक्त मंत्री) ने बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें दी|

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