10 गांवों के हजारों ग्रामीण परेशान
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सरकार ने स्कूल चले हम अभियान के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर योजनाएं बनाई हैं, ताकि हर बच्चा शिक्षित हो सके और देश का भविष्य बन सके। मगर आज भी स्कूल जाने के लिए स्कूली बच्चों को अपनी जान हथेली पर लेकर चलना पड़ता है। कुछ ऐसा ही मामला है रायसेन जिले के सांची विकासखंड के छपराई मार्ग का जहां बच्चे जान जोखिम में डालकर रेलवे पटरी पार करके स्कूल जाने को मजबूर हैं। वहीं किसान भी अपने खेतों पर जाने के लिए हर रोज एक नई जंग लड़ते हैं।ग्रामीण जान जोखिम में डालकर यहां से मोटरसाइकिल उठाकर निकालते हैं। कई बार हादसे होते होते बच चुके हैं। यहां पर कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। रेलवे विभाग ने वर्षों पुराना रेलवे गेट बंद कर दिया गया है। वहीं अंडरब्रिज पुलिया में भी पानी भरा रहता है। ग्रामीण स्थानीय विधायक एवं मंत्री से लेकर आला अधिकारियों तक को कई बार ज्ञापन भी दे चुके हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
10 गांवों के हजारों ग्रामीण परेशान
सांची जनपद के छपराई गांव रेलवे की पुलिया में बरसात के समय पानी भरा होने के कारण लगभग 10 गांव पर स्कूली बच्चों सहित गांव के किसानों को जान जोखिम में डालकर ट्रेनों की पटरी से होकर गुजरने के लिए मजबूर होना पड़ता है। पुलिया में पानी भरा हुआ है। मरीजों को भी इसी मुसीबत से दो चार होना पड़ रहा है। मुसीबत झेल रहे लोगों का कहना है कि 5 साल से विधायक मंत्री और रेल अफसरों से मिल रहे हैं। लिखित शिकायत दे रहे हैं। मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

केमखेड़ी निवासी राकेश लोधी ने बताया कि पहले यहां पर रेलवे गेट हुआ करता था। वहां से आसानी से निकल जाते थे और खेती किसानी करने वाले ट्रैक्टर इस पार से उस पार चले जाते थे। अब आलम यह है कि रेलवे ने बरसों पुराने गेट को बंद कर दिया है, जिससे खेती किसानी करने वाले किसानों सहित स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं। हमारे गांव के लगभग 30 बच्चे रोज सेमरा स्कूल जाते हैं जिनको रेलवे ट्रैक पार करना पड़ता है जिसमें कक्षा आठवीं के छात्र राहुल अहिरवार, अजय लोधी, जानकी कुशवाह, जगदीश कक्षा नवी के छात्र अभिषेक नाथ जबकि कक्षा दसवीं के छात्र विवेक लोधी, नेहा लोधी, स्वाति लोधी, प्रियंका लोधी, अंकित लोधी ,रोशनी कुशवाहा, मोहर सिंह कुशवाह, वर्षा कुशवाह, तनु यादव, मुस्कान राव, संजय लोधी राजेश लोधी जय लोधी मंगल सिंह कुशवाह अशोक कुशवाह गगन कुशवाह काजल अहिरवार यदि बच्चे रोज रेलवे ट्रैक पार कर स्कूल पहुंचते हैं हम गांव वालों को हमेशा डर बना रहता है कि बच्चे स्कूल गए हैं ना जाने क्या हो जाए बारिश के समय पर खाद बीज ले जाने के लिए ट्रैक्टर पटरी के उस पार नहीं जा पाता है, जिससे मजदूरों द्वारा खाद बीज कंधे पर रखकर भेजा जाता है, जिससे खाद बीज से ज्यादा पैसा मजदूरों को देना पड़ता है। अंडर पुलिया में बरसात में 4 महीने तक पानी भरा रहता है। इसके अलावा कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं है। इससे मजबूरी में रेलवे लाइन क्रास करके निकलना पड़ता है।
इनका कहना हे-
मैं 11वीं कक्षा में पढ़ता हूं। केमखेड़ी गांव से 7 किलोमीटर दूर स्कूल पढ़ने जाता हूं। मुझे प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार करना पड़ती हैं। सरकार ने अंडरब्रिज बनाया था, लेकिन उसमें भी पानी भरा रहता है।
केशव लोधी कक्षा ग्यारहवीं
8 से 10 गांवों के हजारों ग्रामीणों को प्रतिदिन अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन क्रास करके दूसरी ओर जाना पड़ता है। हमें अपने वाहन भी रेलवे लाइनों के ऊपर से उठाकर ले जाना पड़ते हैं। हमारी समस्या का कोई भी समाधान नहीं कर रहा है।
राकेश लोधी केमखेड़ी