यशवन्त सराठे बरेली रायसेन
नगर से 10 किलोमीटर दूर ग्राम सेमरी घाट में माध्यमिक शाला के वदतर हालात नजर अंदाज नही किये जा सके जहां सरकार अरबो रूपया देश के वच्चो को शिक्षित वनाने मे खर्च कर रही है वही शिक्षा के जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारीयो को भूलकर वच्चो के जीवन से खिलवाठ कर रहे है शिक्षक के नही होने से शाला हमेशा बंद रहती है।
मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा 21 जून से माध्यमिक शाला खोलने के आदेश जारी हुए ऐसा सूत्रों का कहना है यह साला लगभग तीन-चार वर्षों से शासकीय शिक्षक से विहीन है इसकी शिकायत ग्राम पंचायत सेमरी घाट के सरपंच एवं क्षेत्र के विधायक देवेंद्र सिंह पटेल के द्वारा भी संकुल प्रभारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी को भी अवगत कराया गया है।

अपने पत्र के माध्यम से मगर आज तक ग्राम पंचायत सेमरी घाट के माध्यमिक शाला में एक भी शासकीय शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है अतिथि शिक्षकों के सहारे ही स्कूल संचालित किया जाता रहा है वर्तमान में अतिथि शिक्षकों का कार्यकाल खत्म हो चुका है इसलिए वह जाने में असमर्थ हैं और उन्हें दो-तीन माह से वेतन भी नहीं मिला स्कूल की स्थिति ऐसी है कि स्कूल में पेयजल व्यवस्था शौचालय व्यवस्था रसोई घर तक की सही व्यवस्था नहीं है ना ही बिजली व्यवस्था है और बच्चों को स्कूल आने जाने में रोड की दुर्दशा इतनी खराब रहती है कि भारी कीचड हो जाती है इससे बच्चे स्कूल आने में असमर्थ हो जाते हैं ग्राम पंचायत सेमरी घाट एवं ग्रामीण जनों ने मांग की है कि स्कूल में तुरंत ही शासकीय शिक्षक के साथ अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था की जाए एवं व्यवस्था सुधारी जाए। अन्यथा ग्रामीण जन ग्राम

पंचायत के माध्यम से धरना प्रदर्शन आंदोलन करेंगे जब ग्रामीण जनों ने इसकी शिकायत संकुल प्रभारी यूएस अहिरवार से की तो उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया से पल्ला झाड़ लिया और मध्यप्रदेश शासन को जिम्मेदार बताया