आलेख – प्रो. सीमा सोनी
आज ही के दिन इस पृथ्वी पर एक महान आत्मा ने जन्म लिया था । इस महान आत्मा ने पूरे संसार को अपने ज्ञान से प्रकाशित किया, हालांकि उन्होंने यह कहा था कि अपना प्रकाश स्वयं बनो। इस महान आत्मा को ही हम गौतम बुद्ध के नाम से जानते है । आज हम सब उनको नमन करते हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेते हैं। भगवान गौतम बुद्ध ने यह कहा था कि अपना प्रकाश स्वयं बनो। एक बार जब उनके शिष्य आनंद ने पूछा था कि मैं अपना रास्ता कैसे बनाऊं आप मेरी प्रेरणा हो , लेकिन जब आप नहीं होंगे तब मैं कैसे चलूंगा ? तब गौतम बुद्ध ने कहा कि कोई किसी की प्रेरणा नहीं बन सकता। कोई किसी को प्रकाश नहीं दिखा सकता । हर व्यक्ति को अपना प्रकाश स्वयं प्रज्वलित करना होगा । अपनी प्रेरणा स्वयं बनना होगा,तभी उसे इस भवसागर को पार करने में मदद मिलेगी।

आज इस दर्शन की हम सबको आवश्यकता है । स्वयं गौतम बुद्ध ने अपना राज परिवार का जीवन त्याग करके बोधि वृक्ष के नीचे तपस्या की थी और जब उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई तो बहुत ही सरल तरीके से लोगों को यह बताया की ज्ञान ही मुक्ति का मार्ग है। संसार में दुख है क्योंकि दुखों के कारण है और दुख को समाप्त करने के लिए उन कारणों को समाप्त करना होगा। आज बुद्ध जयंती के अवसर पर हम सब उनके जीवन से प्रेरणा लें क्योंकि छोटी-छोटी बातों पर हम परेशान हो जाते हैं दुखी हो जाते हैं और दूसरों का मुंह ताकते हैं कि वह हमारे दुखों को समाप्त करें ,लेकिन गौतम बुद्ध ने यह रास्ता सुझाया अपना दीप स्वंय बनो , अपनी प्रेरणा स्वयं बनो, अपने उपदेश पर स्वयं चलो तभी तुम्हें मुक्ति मिलेगी । आज हम अपने चारों ओर कई सारी समस्याओं से जूझ रहे हैं और उसका हल खोजने के लिए दूसरों से उम्मीद करते हैं । हमें चाहिए कि हम अपने जीवन को सत्य के मार्ग पर ले जाएं । जहां स्वार्थ ना हो, चालाकी ना हो, झूठ ना हो, आलस ना हो, बेईमानी ना हो, ईर्ष्या ना हो । प्रेम हो, सद्भाव हो, शांति हो, तो अपने आप हमारी दुनिया सुंदर हो जाएगी। हम आलसी ना हो पुरुषार्थी बने दूसरों को नुकसान पहुंचाए बिना इस संसार में अपना जीवन व्यतीत करें तभी हम ज्ञान के मार्ग पर चलने के लायक होंगे । बुद्ध जयंती पर बुद्ध के दिखाए हुए रास्ते चलने के लिए हमें अपना दीप स्वयं प्रज्वलित करना पड़ेगा तभी हम शांत चित्त होकर इस संसार से मुक्ति पा सकेंगे । आज बुद्ध जयंती पर हम कामना करें कि हम अपनी प्रेरणा स्वयं बनेंगे, अपना रास्ता खुद तलाश करेंगे ।

लेखक-सीमा सोनी