रामभरोस विश्वकर्मा मंडीदीप रायसेन
औद्योगिक नगर मेें मुनिश्री निर्णय सागर ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन दर्शन कहता है यदि भगवान और गुरु के आशीर्वाद को अतिशय कारी बनाना है तो जीवन रूपी गाड़ी की स्टेरिंग अपने हाथ में रखो और सावधान हो जाओ। आज गुरु के आशीर्वाद का सवाल है, आज कुछ नहीं होना चाहिए। बस यह है भक्ति। जब कोई भक्त भगवान के पास नमोस्तु करके जाता है तो वह अपनी पूरी ताकत लगा देता है कि आज कुछ नहीं होना चाहिए क्योंकि आज यह मेरी नहीं भगवान की भक्ति का सवाल है। गलतियों को तो माफ किया जाता है, गलतियों को तो जाना जाता है, समझा जाता है। भगवान के सहारे नहीं, आशीर्वाद पर इतना विश्वास मत करो कि ब्रेक के पर से अपना पैर हटा दो। संयम रूपी ब्रेक अपने हाथ में हो और आंख को खुली रखो और फिर जो चमत्कार हो वह दुनिया से कहो यह भगवान एवं गुरु के आशीर्वाद का चमत्कार है, जो मैं इतना आगे बढ़ गया हूं। स्वशक्ति जागरण किसके लिए, अपनी आंख खोलना है, गुरु के आशीर्वाद की शक्ति को अतिशय कारी बनाने के लिए, चमत्कारी बनाने के लिए अपनी आंख खोल कर चलना भगवान एवं गुरु के आशीर्वाद के लिए। स्वशक्ति जागरण का प्रयोग अपने देश के लिए करो, तुम्हारी शक्ति देश के किस काम में आई यह सोचना है। हमें अपने गुरु पर सदा गर्व है आज पूज्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महाराज पर पूरे विश्व को गर्व है। पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष विनोद जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को दोपहर को मुनि श्री निर्णय सागर महाराज व छुुल्लक विष्वरक्ष सागर महाराज का विहार भोपाल की ओर हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रदालु मौजूद रहे।