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सिंघोरी अभ्यारण्य की वीट रमगढ़ा नाके पर वनकर्मियों ने 5 मोटरसाइकिल सहित दो लाख की सागौन जप्त

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विनोद साहू बाड़ी रायसेन

विंध्याचल पर्वत जो कभी बियाबान जंगल और हिंसक जंगली जानवरों की गूँज गूँजती रहती हैं जिसके कारण दिन में जंगल में निवास करने बाले आदिवासियों को अकेले दुकेले निकलने में डर लगता था लेकिन सत्तर के दशक में इसे सरकार ने वन्यजीवों के संरक्षण करने के उद्देश्य से इसे सिंघोरी अभ्यारण्य नाम दिया और इसको आम लोगों के लिए प्रतिबंधित कर दिया । लेकिन जंगल को इन चालीस साल में वनविभाग की उदासीनता कहे या धन कमाने की चाहत रखने से आज जंगल रेगिस्तान की शक्ल में नजर आने लगे ।

वन विभाग के मालखाने में जब्त मोटरसाईकिलें और सागौन की चरपटे भी चोरी हो जाती हैं विभाग रहता कौमा में ।
वनविभाग का जमीनी अमला अपनी नौकरी बचाने के लिए दिनरात जंगलों की खाक छानता रहता हैं और कभी कभार सफलता मिल भी जाती हैं , लेकिन मालखाने से मोटरसाइकिल और चरपटे चोरी होने पर विभाग के द्वारा कोई कार्यवाही न होना ही जमीनी वनकर्मियों को हतोत्साहित करने जैसे हैं .पूर्व रेंजर संतराम चौधरी के कार्यकाल में मालखाने से जब्त मोटरसाइकिल चोरी हो गई और विभाग सोता रहा यह राज तक खुला जब बहीं मोटरसाइकिल फिर से लकड़ी चोरी में जब्त हुई ।

वनबासियों के नाम पर वनविभाग की हजारों एकड़ भूमि का जंगल साफ हो गया और जगह जगह फसलें लहलहा उठी ।
वन विभाग की बड़ी कार्यवाही
बुधवार की रात रमगढ़ा वन रक्षक हरिशंकर दुवे को मुखविर ने सूचना दी आज रात इधर से मोटरसाइकिलों पर सागोन की चरपटे निकलेगी । तब दुवे ने अपने अधिकारी को बताया और स्टाफ को भेजने की माँग की स्टाफ में लगभग छह वनकर्मी घात लगाकर मोटरसाईकिलों का इंतजार करने लगे और लगभग रात चार बजे मोटरसाईकिलों की आवाज़ सुनकर सभी अलर्ट हो गये जैसे ही मोटरसाइकिलें करीब आई जैसे भी लकड़ी चोरों ने वनकर्मियों तो देखा तो मोटरसाइकिलें छोड़कर भागने लगे वनकर्मियों के पीछा करने पर उन पर पत्थरों से हमला कर दिया दिया जिसमें एक वनरक्षक हरिशंकर दुवे के हाथों में

चोट आई लेकिन वनकर्मियों ने पाँच मोटरसाईकिलों के साथ 17 नग सागौन की भारी चरपटें बरामद करने में सफलता प्राप्त की जो सराहनीय हैं इन चरपटों की अनुमानित कीमत लगभग दो लाख से अधिक हैं बहीं यह मोटरसाईकिलें चोरी की हैं जो लकड़ी चोर शहर से चुराकर उनका इस्तेमाल लकड़ी चोरी में करते हैं ..
वन कर्मियों के स्टाफ में वनरक्षक हरिशंकर दुवे रामकृष्ण भारतीय वनरक्षक,राजेंद्र कुमार सुरक्षा श्रमिक, रामसिंह गूजर स्थाईकर्मी , रामविलास लोधी वनपाल ,हमीदुल्ला वनरक्षक , रामकिशन स्थाईकर्मी व हरनाम वनरक्षक के साथ अन्य वनकर्मियों के सहयोग से यह सफलता ऐसे समय में सराहनीय मानी जा सकती जब सिंघोरी अभ्यारण्य में पाँच महीने से रेंजर बिहीन हैं ।

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