जबलपुर। भेड़ाघाट की वादियों को देखने दुनियाभर से पर्यटक आते हैं और साथ ले जाते हैं संगमरमर के पत्थर पर उकेरे गए अपने नाम की पहचान। पति-पत्नी, भाई-बहन, माता-पिता के नाम वाली पट्टी, ऐश ट्रे और सात हाथियों का सेट हस्तशिल्प की वह बेजोड़ कलाकृतियां हैं जिनकी मांग कभी कम नहीं रहती। इसके साथ सफेद संगमरमर से बनने वाली मूर्तियों को खरीदने दूर-दूर से लोग आते हैं। जबलपुर के पत्थरशिल्प को इसी महीने जीआइ टैग मिला है। स्टोन क्राफ्ट कलाकार 90 वर्षों से यह काम कर रहे हैं।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के इंडस्ट्री प्रमोशन एडं इंटरनल ट्रेड ने प्रदेश के पांच हस्त शिल्प उत्पादों भेड़ाघाट का पत्थर शिल्प, डिंडौरी की गोंड पेंटिंग, ग्वालियर का कार्पेट, उज्जैन की बाटिक प्रिंट व बालाघाट के वारासिवनी की रेशम साड़ी को सात अप्रैल को जीआइ टैग प्रदान किया है। प्रदेश में जीआइ टैग प्राप्त उत्पादों की संख्या 19 हो गई है। जीआई टैग (जियोग्राफिकल इंडिकेशंस टैग) एक प्रकार का लेबल है, जिसमें किसी उत्पाद को विशेष भौगोलिक पहचान दी जाती है, जो केन्द्रीय के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा दिया जाता है।
पांच पैसे प्रति अक्षर में लिखा जाता था संगमरमर के पेपरवेट पर नाम
हस्तशिल्प कलाकार एहसान खान ने बताया कि इस काम में यह उनकी तीसरी पीढ़ी है, अब बेटा भी यही काम कर रहा है। इस कला की शुरुआत के समय संगमरमर के नाम लिखे पेपर वेट बनाए जाते थे। पांच पैसे प्रति अक्षर के हिसाब से कीमत ली जाती थी।
शिवलिंग और जिलहरी की बढ़ी मांग
संगमरमर के पत्थरों को तराशकर शिल्पी, मूर्तियां, सीनरी, ज्वैलरी आदि का निर्माण करते हैं। अब आधुनिक औजार से हार्ड मार्बल से भी मूर्तियां बना रहे हैं। इस पत्थर से शिवलिंग, जिलहरी, देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं। धुआंधार और बंदरकूदनी की सीनरी यहां के लोकप्रिय उत्पादों में से एक है जो साफ्ट मार्बल से बनाई जाती हैं।
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