भोपाल। टीटी नगर दशहरा मैदान पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा का शनिवार को समापन हो गया। आखिरी दिन श्री बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री कथा में पहुंचे। देवकीनंदन ठाकुर महाराज और पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री का मिलन हुआ। दोनों आध्यत्मिक गुरु ने देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग को लेकर हुंकार भरी। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बीडी शर्मा ने दोनों गुरुओं को गदा भेंट की। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग उठाई गई। साथ ही अयोध्या में श्री राम मंदिर के बाद भगवान अब मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की मांग उठाई गई।
व्यास पीठ से दोनों संतों ने मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि पर मंदिर निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि जल्द ही एक आंदोलन की शुरुआत भोपाल से ही करेंगे। फिर से हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग दोहराई गई। इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संबोधित करते हुए कहा कि कथा में देवकीनंदन महाराज ने बेव सीरीज पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। जल्द ही प्रदेश में बेव सीरीज पर रोक लगाने का कदम उठाएंगे। कथा के समापन पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बीडी शर्मा, आयोजन समिति के अध्यक्ष भाजपा नेता राहुल कोठारी समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री श्रद्धालुओं से बोले- मेरे पागलो, कैसे हो?
श्री बागेश्वर धाम के कथावाचक पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने संबोधन की शुरूआत करते हुए कहा कि मेरे भोपाल के पागलो, कैसे हो? फिर कहा कि भोपाल के लोग जोड़ने में माहिर हैं। कहा कि वक्ता को नहीं वक्तव्य को पकड़ें। शास्त्री जी ने हनुमान जी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह से हनुमान जी की पूंछ में आग लगने के बाद उन्होंने अपना रूप छोटा कर लिया था, उसी तरह जीवन में जब भी संकट आए तो छोटे बन जाओ, संकट कट जाएगा।
कन्हैया को आजाद कराने आंदोलन
देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि मैं मथुरा से आया हूं। जब भी कृष्ण जन्मभूमि पर माथा टेकता हूं, तो मेरी नजर कहीं ओर टिक जाती है। मेरे कान्हा को आजाद कराने के लिए जल्द आंदोलन की शुरुआत करूंगा। पूरे राष्ट्र में आंदोलन चलेगा। वहीं देवकीनंदन ठाकुर महाराज बोले कि दिल्ली में भगवान राम की शोभायात्रा निकालने की अनुमति नहीं मिलती है। हमारे देश में भगवान की शोभायात्रा नहीं निकालेंगे तो पाकिस्तान में जाकर यात्रा निकालें। जब तक तुम लोग जातियों में बंटे रहोगे तो ऐसा ही होगा। जिस दिन आप सभी लोग एक हो जाएंगे। किसी भी हिम्मत नहीं कि हमें यात्रा निकालने से कोई रोक सके।
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