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खुद अंधेरे में रहकर जान जोखिम में डालकर लोगों को देते हैं रोशनी

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सांचीरायसेन से देवेंद्र तिवारी

वैसे तो सरकारी कर्मचारियों का समय ड्यूटी का आठ घंटे कहा जाता है परन्तु कुछ ऐसे भी विभाग है जो लोगों को सुविधा मुहैया कराने चौबीस घंटे अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की समस्या से निजात दिलाने में अहम भूमिका अदा करते हैं इनमें आपातकालीन सेवा के दायरें में बिजली कर्मचारी पुलिस कर्मियों सफाई कर्मी के साथ ही नल-जल कर्मचारी शामिल रहते हैं बाबजूद इसके सुविधा उपलब्ध कराने में देरी अथवा समस्या आने पर लोगों के अपशब्दों सहित मारपीट का भी सामना करना पड़ता है ।
जानकारी के अनुसार सैकड़ों शासकीय विभागों में हजारों की संख्या में कर्मचारी अधिकारी तैनात रहते हैं जो शासन के आदेशानुसार कार्य करते हैं परन्तु इन कर्मचारियों को शासन ने घंटे की समय-सीमा निर्धारित कर रखी है परन्तु इन कर्मचारियों की श्रेणी में कुछ कर्मचारी अधिकारी ऐसे भी होते हैं जिनकी कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं होती जिन्हें अपने कर्तव्य निर्वहन के लिए चौबीस घंटे चौकस रहना पड़ता है इन कर्मचारियों को आपातकालीन सेवा के दायरें में गिना जाता है आपातकालीन सेवा के दायरें में आने वाले कर्मचारियों में पुलिस अधिकारी व पुलिस कर्मी रहते हैं जिन्हें चौबीस घंटे आपने कर्तव्य के लिए तैयार रहना पड़ता है कहीं घटना दुर्घटना अपराध शांति भंग होना शवों को तत्काल उठा कर अस्पताल तक पहुंचना जैसे कार्य में अपनों से दूर न रात न दिन देखकर करना पड़ता है इसी प्रकार बिजली अधिकारी कर्मचारियों का भी यही हाल रहता है ।खुद अंधेरे में रहकर लोगों को जान जोखिम में डालकर देते हैं रोशनी ।
सांची,,, वैसे तो सरकारी कर्मचारियों का समय ड्यूटी का आठ घंटे कहा जाता है परन्तु कुछ ऐसे भी विभाग है जो लोगों को सुविधा मुहैया कराने चौबीस घंटे अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की समस्या से निजात दिलाने में अहम भूमिका अदा करते हैं इनमें आपातकालीन सेवा के दायरें में बिजली कर्मचारी पुलिस कर्मियों सफाई कर्मी के साथ ही नल-जल कर्मचारी शामिल रहते हैं बाबजूद इसके सुविधा उपलब्ध कराने में देरी अथवा समस्या आने पर लोगों के अपशब्दों सहित मारपीट का भी सामना करना पड़ता है ।
जानकारी के अनुसार सैकड़ों शासकीय विभागों में हजारों की संख्या में कर्मचारी अधिकारी तैनात रहते हैं जो शासन के आदेशानुसार कार्य करते हैं परन्तु इन कर्मचारियों को शासन ने घंटे की समय-सीमा निर्धारित कर रखी है परन्तु इन कर्मचारियों की श्रेणी में कुछ कर्मचारी अधिकारी ऐसे भी होते हैं जिनकी कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं होती जिन्हें अपने कर्तव्य निर्वहन के लिए चौबीस घंटे चौकस रहना पड़ता है इन कर्मचारियों को आपातकालीन सेवा के दायरें में गिना जाता है आपातकालीन सेवा के दायरें में आने वाले कर्मचारियों में पुलिस अधिकारी व पुलिस कर्मी रहते हैं जिन्हें चौबीस घंटे आपने कर्तव्य के लिए तैयार रहना पड़ता है कहीं घटना दुर्घटना अपराध शांति भंग होना शवों को तत्काल उठा कर अस्पताल तक पहुंचना जैसे कार्य में अपनों से दूर न रात न दिन देखकर करना पड़ता है।

इसी प्रकार बिजली अधिकारी कर्मचारियों का भी यही हाल रहता है जो रात दिन चौबीस घंटे लोगों को बिजली सुविधा उपलब्ध कराने चौबीस घंटे जुटे रहना पड़ता है जब कभी व्यवस्था जुटाने में असफल साबित हो जाते हैं तब लोगों की मारपीट के साथ ही भद्दी टिप्पणी भी सुनने को मिल जाती है इस मामले में लोगों की यह मानसिकता भी उजागर होते दिखाई दे जाती है कि वेतन लेकर काम कर रहे हैं परन्तु लोग इस बात को पूरी तरह भूल जाते हैं कि जब लोग घरों में अंधेरे में नहीं रह पाते तब यह कर्मचारियों को अंधेरे बारिश ठंड गर्मी में अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को आपूर्ति सुचारू बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाने में कोई कौर कसर नहीं छोड़ते अनेक बार इन कर्मचारियों के साथ अप्रिय घटनाएं भी घटती देखी है जिससे अनेक लोग अपनी जान भी गंवा बैठते हैं तब इनके परिवार के हर से साया भी उठते देखा है बावजूद इसके यह अपने कर्तव्य का निर्वहन करते दिखाई देते हैं इसी प्रकार सफाई व्यवस्था बनाने वाले कर्मचारियों को भी रात-दिन लोगों को सफ़ाई प्रदान कर तथा अपने क्षेत्रों को गंदगी मुक्त करने का बीड़ा उठा कर अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में पीछे नहीं दिखाई देते यही हाल जलप्रदाय कर्मचारियों का भी बना रहता है जब कभी लोग अपनी गहरी नींद लेते हैं तब पेयजलापूर्ति समय से करने कर्मचारियों को रात दिन जुट कर मशक्कत करनी पड़ती है तथा समय पर जलापूर्ति कर अपने काम का निर्वहन करने में पीछे नहीं दिखाई देते । परन्तु इन कर्मचारियों तक न तो शासन ने ही समाज में जुटे लोगों का सम्मान पहुंच पाता है जबकि ऐसे रात-दिन अपने कर्तव्य निर्वहन करने वाले कर्मचारी वास्तविक सम्मान के हकदार कहे जा सकते हैं ।

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