आलेख
अरुण पटेल
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस में अलग ही अंदाज में नजर आये और सख्त लहजे में उन्होंने कलेक्टर, कमिश्नर, एसपी, आईजी सहित अन्य मैदानी अमले को मिशन मोड में काम करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि आईएएस अफसर अपने पूरे कैरियर में 6 से 7 साल कलेक्टर रहता है इसलिए ऐसा काम करो कि लोग याद रखें क्योंकि आपसे ही सरकार की इमेज बनती है। आफिस में बैठने की बजाय मैदान में जाओ, आप जैसा करोगे वैसी ही सरकार की इमेज बनेगी। सोशल मीडिया के बढ़ते महत्व को एक प्रकार से रेखांकित करते हुए शिवराज ने कहा कि आप लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें क्योंकि यहीं से कलेक्टरों का परफारमेंस पूरा देश देखता है। अपराधों पर कड़ाई से नियंत्रण लगायें और जहां जरुरत हो वहां बिना हिचके एक्शन लें। उन्होंने एक पूरे दिन कलेक्टर, एसपी सहित अन्य मैदानी अमले से विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उनका कहना था कि जिला एवं संभागों में कलेक्टर और कमिश्नर ही प्रतिनिधि हैं। लोकतंत्र में हमारा लक्ष्य जनता का कल्याण और उन्हें बेहतर जीवन देना है इसलिए प्रदेश वासियों को बिना परेशानी के समयसीमा में बिना लिये-दिये योजनाओं का लाभ मिले और शासन से संबंधित काम आसानी से हो जायें, यही सुशासन है। भले ही शिवराज की अपेक्षा कुछ भी हो लेकिन उनकी अपेक्षा की कसौटी पर प्रशासनिक अमला कितना खरा उतरता है यह कुछ समय बाद ही पता चल सकेगा, क्योंकि जो आदत वर्षों से पड़ गई है उसको बदलने में कुछ न कुछ समय तो लगेगा ही। प्रदेश में 5642 अवैध कालोनियां हैं जिन्हें वैध करने पर जोर देते हुए शिवराज ने कहा कि इसके लिए व्यावहारिक नीति बने। वर्षों से जो कालोनियों में रह रहे हैं उन्हें परेशानी न हो, इसके लिए समयबद्ध अमल पर उन्होंने जोर दिया। कड़े तेवर दिखाते हुए उनका कहना था कि कालाबाजारी बर्दास्त नहीं करेंगे, कोई गरीब का राशन खाये तो तुरन्त एक्शन लें और कलेक्टर खुद राशन की निगरानी करें। माफियाओं पर सख्त कार्रवाई करने की बात कहते हुए उन्होंने अतिक्रमण विरोधी मुहिम लगातार चलाने का निर्देश देते हुए यह भी सीख दी कि विभाग आपस में समन्वय से काम करें। आप साधारण नहीं हैं यह कहते हुए उन्होंने कहा कि हम वो लोग हैं जिन्हें जनता की जिन्दगी बदलने का सौभाग्य मिला है, हम उनकी जिन्दगी बदलने के लिए काम कर रहे हैं, आप सभी साधारण नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। 52 कलेक्टर, 10 कमिश्नर, वल्लभ भवन के वरिष्ठ अफसर यही टीम मध्यप्रदेश है जो प्रदेश की उन्नति के लिए समर्पित है। उनकी यह भी सलाह थी कि कलेक्टर्स नवाचार करें, अलग से ओपन हाउस चर्चा भी करें, जो अच्छा काम करे उसे पुरस्कार दें और खराब काम पर दंड की व्यवस्था हो। जहां उन्होंने कुछ कलेक्टर्स की अच्छे कामों के लिए तारीफ की तो वहीं दूसरी ओर पीएम आवास और राशन वितरण जैसी योजनाओं में लेटलतीफी के लिए अप्रसन्नता भी जताई। उनका जोर इस बात पर था कि लक्ष्य के हिसाब से काम हों। काम की गुणवत्ता सुधारी जाए, प्रशासनिक क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए और कौन बेहतर काम करता है इसका जुनून स्पर्धा में हो। जहां उन्होंने कुछ की पीठ थपथपाई तो कुछ को सख्ती भी दिखाई। जब कलेक्टरों की बारी आई तो उन्होंने जो कुछ कहा उसका केंद्रीय स्वर यही था कि पटवारी और सचिव गांवों में रहते ही नहीं हैं कई दूसरे कामों में उलझे रहते हैं इसका हल निकालना होगा और खाली पदों की समस्या को भी हल करना होगा। नवाचारों के लिए अलग से फंड होने की बात आने पर शिवराज ने भी नवाचार के लिए अलग फंड की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इस प्रकार अब राजनीतिक मोर्चे पर पूरा ध्यान देने के साथ ही शिवराज प्रशासनिक अमले में भी कसावट लाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं ताकि जिनके हितों के लिए जो योजनायें बनें उनका लाभ हितग्राही तक पहुंचे । हितग्राहियों का एक अलग वोट बैंक तैयार करने की पहल भाजपा केंद्रीय स्तर से कर रही है और शिवराज भी उसमें अन्य राज्यों से अब्बल रहना चाहते हैं।

–लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं
-सम्पर्क: 9425010804, 7999673990