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जागरूकता के जरिए कैंसर से बचाव संभव- डॉ अर्जुनलाल शर्मा

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– पूर्व सीएमएचओ का विश्व कैंसर दिवस 4 फरवरी पर विशेष लेख

शिवपुरी से रंजीत गुप्ता

शिवपुरी के पूर्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और वर्तमान में आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ अर्जुन लाल शर्मा का कहना है कि जागरूकता से कैंसर से बचाव किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सन 2000 से लगातार विश्व कैंसर दिवस मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य संचारी रोगों से विश्व भर में हो रही 70 प्रतिशत मौतों को रोकना है। भारतवर्ष में भी 63 प्रतिशत मृत्यु का कारण संचारी रोग हैं। उसमें भी मुख्य भूमिका कैंसर की होती है। ऐसे कैंसर जिनको रोका जा सकता है अर्थात जिनकी प्रभाव से होने वाली मृत्यु को टाला जा सकता है उनके बारे में ज्ञान होना आवश्यक है ऐसे कैंसर को पहचानने की क्षमता जागरूकता, शिक्षा द्वारा हम सब मिलकर कैंसर से होने वाली 10 मिलियन मृत्यु को प्रतिवर्ष को बंद कर सकते हैं। इसके लिए हमें उस खाई को पाटना होगा जो कैंसर मानव के बीच पहचान सकते हैं। मुख कैंसर, स्तर कैंसर, सर्वाइकल कैंसर को समय रहते हम पहचान लेते हैं तो इन्हें ठीक किया जा सकता है। कैंसर की मूलधारणा है कि कैंसर इज ए वारंट ऑफ डेथ को हम असत्य सिद्ध कर सकते हैं। आवश्यकता जन चेतना व जनआंदोलन की है। इसके लिए शासकीय स्तर पर हमारे लोकप्रिय जन-जन के शुभचिंतक प्रधानमंत्री जी द्वारा आयुष्मान भारत का जो दूसरा चरण प्रारंभ किया गया है वह इसको रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। आयुष्मान भारत के प्रथम चरण में आयुष्मान कार्ड धारी प्रत्येक परिवार को 1 वर्ष में 5 लाख रुपए का बीमा है जिससे निशुल्क उपचार संभव है। दूसरे चरण में आरोग्यं केंद्रों की स्थापना कर ग्रामीण स्तर तक आशा, एएनएम, सीएचओ के माध्यम से कैंसर का परीक्षण, चिहांकन एवं उपचार की व्यवस्था की गई है। प्रति शनिवार को आरोग्यं केंद्र पर होने वाला योगा, मनोरंजन कार्यक्रम संक्षिप्त नाट्यकला इत्यादि के द्वारा जन जागरूकता का कार्य किया जा रहा है। मुंह का छाला जो 7 दिन में ठीक ना हो, मुंह के अंदर की झिल्ली का सफेद हो जाना एवं नियमित तंबाकू, गुटखा अथवा सुपारी खाने वाले नियमित जांच कराएं एवं उपरोक्त को बंद कर दें। सिगरेट, बीड़ी, फैनी से गला एवं फेफड़ों का कैंसर हो सकता है का लेना बंद करें। इसी तरह हथेली से स्तन का स्पर्श के माध्यम से उसमें होने वाली गांठ को जांच सकते हैं। ग्राम एवं उप स्वास्थ्य केंद्रों को सीएचओ को जांच करा सकते हैं। गांव में शामकाल को आपसी बैठक कर स्वास्थ्य चर्चा के माध्यम से जनजागरूकता के माध्यम से बात कर सकते हैं। विद्यालय में इस तरह की चर्चा और तंबाकू निषेध पर विचार कर सकते हैं। इस तरह हम रोकथाम वाले कैंसर बचाव कर मृत्यु दर घटा सकते हैं।

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