पटना । बिहार की नीतिश सरकार में शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने तुलसीदास द्वारा लिखित रामचरितमानस को समाज में नफरत फैलाता है कहकर विवाद खड़ा कर दिया। नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के 15वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित कर मंत्री ने कहा कि रामचरितमानस और मनुस्मृति समाज को विभाजित करने वाली पुस्तकें हैं। यह टिप्पणी भाजपा को अच्छी नहीं लगी जिसने बिहार के मंत्री पर विवादास्पद बयान से वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। शिक्षा मंत्री के बयान पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि रामचरित मानस के बारे में जिसने कहा उन्हें ज्ञान सीखने की आवश्कता है। उन्होंने करोड़ों लोगों की श्रद्धा पर जो चोट पहुंचाया है ये सनातन धर्मावलंबी कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्हें देशवासियों से माफी मांगना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री चौबे ने कहा कि ऐसा मंत्री को मंत्री पद पर रहने का अधिकार नहीं उन्हें तुरंत बर्खास्त करना चाहिए। इस बीच अयोध्या के महंत जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की। उन्हें एक सप्ताह के भीतर मंत्री पद से बर्खास्त कर देना चाहिए। और उन्हें माफी मांगनी चाहिए अगर ऐसा नहीं होता है तब मैं बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर की जीभ काटने वाले को 10 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा करता हूं। राजद नेता ने कहा कि रामचरितमानस का विरोध क्यों किया गया और किस भाग का विरोध किया गया? निचली जाति के लोगों को शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी और रामचरितमानस में कहा गया है कि निम्न जाति के लोग शिक्षा प्राप्त करने से वैसे ही जहरीले हो जाते हैं जैसे दूध पीने के बाद सांप हो जाता है। मनुस्मृति रामचरितमानस गुरु गोलवलकर की बंच ऑफ थॉट्स … ये किताबें ऐसी किताबें हैं जो नफरत फैलाती हैं।
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