जेडी गोलानी नासागिर भोपाल
लेखक श्री सुरेश पटवा लिखित दो कृतियां सतपुड़ा पर्वत पर यात्रा वृतांत “सुरम्य सतपुड़ा” और बाल उपन्यास “जंगल की सैर” नामक पुस्तके दुष्यंत स्मारक संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में लोकार्पित की गई।
कार्यक्रम की शुरुवात श्रीमती कांता रॉय द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से होकर संग्रहालय के निदेशक श्री राजुरकर राज ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी।
पर्यावरणविद् डॉ.सुदेश वाघमारे ने दोनों पुस्तकों की विषय वस्तु पर प्रकाश डाला। शहर के साहित्यकारों की उपस्थिति में डॉ.सुदेश वाघमारे की अध्यक्षता और गोकुल सोनी के मुख्यआतिथ्य में यह लोकार्पण किया गया।
श्री वाघमारे जी ने लेखक के चिंतनपरक और अनुभवजन्य लेखन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
मुख्य अतिथि गोकुल सोनी ने कहा कि श्री पटवा जी की पुस्तकें पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रेरित करती हैं। इन्हें पढ़कर लगता है कि पर्वत और जंगल मनुष्य के सहभागी हैं। इनका संरक्षण पुनीत कर्तव्य है। उन्होंने “लेखक को जानिए” कार्यक्रम के अंतर्गत श्री पटवा से उनके लेखन के संबंध में पाँच प्रश्न पूछे। जिनके लेखक ने सटीक उत्तर देते हुए यात्रा के दौरान घटी रोचक घटनाएं सुनाई।
सारस्वत अतिथि जवाहर कर्णावत ने भी लेखक के बहु आयामी व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उल्लेखनीय है कि लेखक नर्मदापुरम(होशंगाबाद)जिले की मप्र की सबसे बड़ी अखंड तहसील मुख्यालय सोहागपुर में जन्मे पले बढ़े हैं। मनोज गुप्त ने “सुरम्य सतपुड़ा” और महेश सक्सेना जी ने “जंगल की सैर” पुस्तक की सटीक समीक्षा प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का संचालन श्री घनश्याम मैथिल ने किया।इस अवसर पर मंचासीन अतिथियो को वृक्षमित्र सुनील दुबे ने पौधे भेंट कर स्वागत किया। श्री शिवांश सरल ने आभार प्रदर्शन किया।