संरक्षण के इंतजार में नक्काशीदार कलाकृति और भग्नावशेष:दमोह और पन्ना जिले की सीमा ने निकट दिखाई देते अलंकृत स्तंभ और प्रस्तर खंड
दमोह से धीरज जॉनसन की रिपोर्ट
दमोह शहर से लगभग 85 किमी दूर पन्ना जिले की सीमा के निकट खूबसूरत कलाकृति से भरपूर एक प्राचीन मंदिर दिखाई देता है जिसके नक्काशीदार भग्नावशेष भी यहां वहां बिखरे हुए दिखाई देते है
अगर इन्हे संरक्षित कर दिया जाए तो पुरातात्विक महत्व का यह स्थल शोधार्थियों के लिए लाभदायक भी हो सकता है।
स्थानीय निवासी आनंद,वीरेंद्र,संतान सिंह बताते है कि इस प्राचीन मंदिर को शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है लोग इसे खेर माता का मंदिर भी कहते है। इसके आस पास भी भग्नावशेष है। गांव में आज भी जब कोई घर बनाते या किसी कारण खुदाई करते है तो नक्काशीदार पत्थर मिल जाते है। अगर इस प्राचीन मंदिर को संरक्षित किया जाए तो पुरातात्विक महत्व का यह स्थल सुरक्षित रहेगा।

इस ग्राम का जिक्र राय बहादुर हीरालाल द्वारा लिखित दमोह दीपक गजेटियर (1919) में भी मिलता है जहां लिखा है कि हटा तहसील में हटा से २० मील है,यहाँ पर एक पुराना शिव का छोटा मंदिर है जो बहुत ही सुन्दर बना है, यह सात आठ सौ बरस पुराना है, और कुछ टूट- फूट भी गया है, परंतु दरवाजे पर अब भी बहुत सी सुन्दर मूर्त्तियां जैसी की तैसी बनी हैं।

“गणपति आठों मातरः ब्रह्मा शंभू रमेश ।
नव ग्रह तिनके बीच में बाजू भैरव वेष ॥
गंगा जमुना देहरी, कीरतिमुख तल मांहि । मुहनामठ चौखट लिखे, इतने देव दिखाहिं ॥
“एक से अधिक शैव प्रतिमाओं का प्राप्त होना जिनमें उमा महेश्वर सरस्वती और अलंकृत स्तंभ खंड प्रस्तर खंडों पर ऊकेरे हुए प्रतीत होते हैं इन सब स्थापत्य को देखकर यह समीचीन जान पड़ता है कि यह स्थापत्य देवालय स्वरूप निश्चित तौर पर शिव मंदिर रहा होगा”
डॉ सुरेंद्र चौरसिया, मार्गदर्शक, रानी दमयंती जिला पुरातत्व संग्रहालय दमोह,मध्य प्रदेश