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ओबीसी :: पीठ में “छुरा” बनाम “संवैधानिक दर्जा “

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आलेख
अरुण पटेल

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार को दक्षिण भारत के प्रवास पर थे और तेलंगाना, केरल व कर्नाटक में रहेऔर कांग्रेस पर जमकर निशाना भी साधा। आध्यात्म से लेकर योग और राजनीतिक कार्यक्रम में अलग-अलग भाग लिया। भाजपा और कांग्रेस इन दिनों आदिवासी वर्ग को साधने में लगी हुई है, खासकर मध्यप्रदेश में इस वर्ग में अपनी पैठ बढ़ाने को लेकर दोनों में होड़ लगी है। कर्नाटक के कलबुर्गी में भाजपा के अन्य पिछड़ा वर्ग के मोर्चे के सम्मेलन में शिवराज फुल फार्म में नजर आये और उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है, जबकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया है। मध्यप्रदेश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस ने कोई भी अन्य पिछड़े वर्ग यानी ओबीसी का मुख्यमंत्री नहीं बनाया जबकि भाजपा ने तीन-तीन मुख्यमंत्री बनाये हैं। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में 2003 से भाजपा के तीन नेता मुख्यमंत्री बने हैं उनमें उमा भारती, बाबूलाल गौर एवं स्वयं शिवराज सिंह चौहान हैं। इनमें से उमा भारती का कार्यकाल सबसे कम समय का रहा और उनके पदत्याग में भी कर्नाटक की एक घटना ही मूल कारण रही। जबकि बाबूलाल गौर का कार्यकाल एक साल से कुछ अधिक रहा लेकिन सबसे लम्बा कार्यकाल शिवराज सिंह चौहान का ही है। 2018 के चुनाव में बहुत बारीक अन्तर से कांग्रेस से पिछड़ने के बाद दलबदल के बाद जो सरकार बनी उसके मुखिया के तौर पर फिर से शिवराज को ही बागडोर सौंपी गयी। इसका एक कारण यह भी है कि प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान का अपना आभामंडल है और उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों से अपने मजबूत रिश्ते बनाये हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भगवान कृष्ण से तुलना करते हुए शिवराज ने कहा कि भगवान कृष्ण ने कहा था कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ेंगे तब-तब मैं धरती पर आऊंगा, इसलिए मोदी आये हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक में कांग्रेस ने कट्टरपंथी पीएफआई को संरक्षण दिया, आज गर्व है कि पूरे देश में पीएफआई पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। अपनी धर्मपत्नी साधना सिंह के साथ हैदराबाद स्थित रामकृष्ण मिशन के नये मुख्यालय कान्हा शांति वनम् में बनाये गये हार्टफुलनेश सेन्टर में ध्यान भी किया। उन्होंने कहा कि यह सेंटर भौतिकता और आध्यात्म का समन्वय है। यहां पर उन्होंने वाटर हारवेस्टिंग से युक्त उच्च गुणवत्ता की तकनीक को समझा। केरल राज्य के कोल्लम में माता आनंदमयी देवी के आश्रम में भी वे पहुंचे जहां उन्होंने कहा कि हमने साक्षात् देवी मॉ के दर्शन नहीं किए लेकिन यह भी मॉ हैं। मॉ प्रेम, दया और करुणा की मूर्ति हैं। वे सचमुच में अमृतमयी हैं जो लोगों को नया जीवन दान दे रही हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उनके प्रेम के संदेश को मध्यप्रदेश में बांटने का प्रयास करुंगा। सभी की इच्छा है कि आप मध्यप्रदेश आकर करुणा, दया और प्रेम का सागर बहायें। इस आश्रम के 17वें वार्षिक समारोह को सम्बोधित करते हुए शिवराज ने उनकी सरकार की लाड़ली लक्ष्मी योजना का भी हवाला दिया और कहा कि राज्य सरकार बेटियों व बहनों के कल्याण के लिए संकल्पबद्ध है। स्वसहायता समूह के माध्यम से बहनों को आर्थिक उन्नयन के अवसर दिये गये हैं, वहीं लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनायें बेटियों के लिए वरदान बनी हैं। उनका यह भी कहना था कि मध्यप्रदेश में कन्याओं के जन्म को प्रोत्साहित किया गया है और प्रदेश में 43 लाख लाड़ली लक्ष्मी बेटियां हैं जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए सहायता दी जा रही है। राग-द्वेष भूलकर सभी वर्गों के विकास के लिए कार्य हो रहे हैं। सभी धर्म व शास्त्रों का एक ही सार है कि प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा के दर्शन किए जा सकते हैं। इस प्रकार एक ही दिन तीन राज्यों में शिवराज अलग-अलग भूमिका में नजर आये।

-लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं
-सम्पर्क: 9425010804, 7999673990

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