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एक करोड़ की स्कूल बिल्डिंग बनी शोपीस, बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर

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ज़िम्मेदार अधिकारीयों को नही है उद्घाटन की फुर्सत

सलामतपुर रायसेन से अदनान खान की रिपोर्ट

आपने ऐसी कई तस्वीर देखी होंगी जहां स्कूल नहीं होने के अभाव में बच्चे बाहर पढ़ाई करते हुए दिखाई दिए होंगे। मगर आज हम आपको एक ऐसी तस्वीर दिखाने जा रहे हैं। जहां 1 करोड़ रुपए की लागत से स्कूल की बिल्डिंग तो बन गई है। मगर वह सिर्फ शोपीस बनकर रह गई है। बच्चे पीपल के पेड़ की छांव में पढ़ने को मजबूर हैं।


दरअसल मामला है सांची विकासखंड के ग्राम पंचायत सेमरा गांव का जहां शासकीय हाईस्कूल की पुरानी बिल्डिंग में जगह कम पड़ती थी। और बारिश के समय में स्कूल में पानी भर जाता था। इस समस्या को लेकर एक करोड़ रुपए लागत की सर्व सुविधा युक्त बिल्डिंग मंजूर हुई और बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई। मगर 1 करोड़ लागत रुपए की स्कूल की बिल्डिंग अपने उद्घाटन के इंतजार में अपेक्षा का शिकार हो रही है। वही चौथी एवं पांचवी क्लास के बच्चे बाहर पीपल के पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। क्योंकि पुराने स्कूल की बिल्डिंग में विगत दिनों हुई बारिश से पानी भर गया था। जहां कीचड़ भरी हुई है।और स्कूल में सिणन है। गांव के सरपंच भानु लोधी ने बताया कि कई दिन से अधिकारी आजकल आजकल कहकर बिल्डिंग का उद्घाटन टाल रहे हैं। जिससे हमारे गांव के बच्चों को मजबूरन पेड़ के नीचे पढ़ाई करना पड़ रही है।

इनका कहना है-
1 करोड़ रुपए की स्कूल बिल्डिंग शोपीस बनकर रह गई है। बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। अधिकारी उद्घाटन के लिए कई बार डेट दे चुके हैं। लेकिन नई बिल्डिंग का उद्घाटन नहीं हो पा रहा है। हर बार एक नई डेट दी जाती है उद्घाटन के लिए।
भानु लोधी, सरपंच ग्रा.पं. सेमरा

शासन प्रशासन बच्चों के ऊपर विशेष तौर पर ध्यान नहीं दे रही है। स्कूल और शिक्षा के स्तर को भी राजनीति का अखाड़ा बना दिया गया है। उसका जीता जागता उदाहरण ग्राम पंचायत सेमरा में देखने को मिल जाएगा जहां 1करोड़ रुपए की स्कूल बिल्डिंग को बनाकर तैयार तो कर दिया गया है। लेकिन 4 महीने से अधिकारियों को उसके उद्घाटन करने की भी फुर्सत नहीं मिल पा रही है। जिसकी वजह से बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। परेशान तो हमारे बच्चे हो रहे हैं उनके बच्चे परेशान होते तो उनको समझ में आता।
इशाक खान, स्थानीय निवासी

पुरानी स्कूल बिल्डिंग में पानी भरा हुआ है। और उसके साथ ही वह जर्जर हालत में हो गई है। नई स्कूल बिल्डिंग का निर्माण किया गया था। ताकि बच्चों को आसानी के साथ शिक्षा उपलब्ध हो सके। लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी नए स्कूल भवन का उद्घाटन नहीं हो पा रहा है। जिसकी वजह से हमारे बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। एक पेड़ के नीचे ही 2-2 कक्षाओं की पढ़ाई चल रही है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस और ध्यान नहीं दे रहे हैं।
अजय सेन, स्थानीय निवासी

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