मां दुर्गा की अष्टभुजा का मतलब आठ प्रकार की शक्तियों से है
रिपोर्ट देवेश पाण्डेय सिलवानी रायसेन
सिलवानी तहसील के ग्राम साईखेडा़ श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर पर चल रही सप्तदिवसिय मार्कण्डेय पुराण एवं वायु पुराण कथा के तीसरे दिवस कथा व्यास वेदाचार्य पंडित रामक्रपालु शर्मा ने भक्तो को भगवती की कथा सुनाते हुए कहा की मानव सिर्फ देवी दुर्गा की भक्ति सच्ची श्रद्धा वा निस्वार्थ करें।तो जीव का कल्याण हो जायेगा। जगदम्बा साक्ष्तय ब्रह्ममय है। जो व्यक्ति देवी भक्ति करता है। उसका परिवार एव आने बाली पीढ़ी यश प्राप्त करती हैं। यश, धन, शांति सब मानव को प्राप्त होते है। मैया की बड़ी महिमा है। मां ने सारे अशुर का उद्धार किया, मां की भक्ति से ही मानव के जीवन में उजाला हो सकता है। संस्कार बालको को ऐसे दे की वो धर्म पर अडिग रहे,देश सेवा के साथ साथ संतो का सत्संग करे जिस से उन्हें अपने धर्म और कर्तव्यों का एहसास हो सके।
मां दुर्गा की अष्टभुजा का मतलब आठ प्रकार की शक्तियों से है। शरीर-बल, विद्याबल, चातुर्यबल, धनबल, शस्त्रबल, शौर्यबल, मनोबल और धर्म-बल इन आठ प्रकार की शक्तियों का सामूहिक नाम ही दुर्गा है। मां दुर्गा ने इन्हीं के सहारे बलवान राक्षसों पर विजय पायी थी।समाज को हानि पहुंचाने वाली आसुरी शक्तियों का सामूहिक और दुष्ट व्यक्तियों का प्रतिरोध करने के लिए हमें संगठन शक्ति के साथ-साथ उक्त शक्तियों का अर्जन भी करना चाहिए। उक्त आठ शक्तियों से संपन्न समाज ही दुष्टताओं का अंत कर सकता है, समाज द्रोहियों को विनष्ट कर सकता है। दुराचारी षड्यंत्रकारियों का मुकाबला कर सकता है।।
अधिक मात्रा में भक्त आकर कथा श्रवण कर रहे है ।