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विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग मंदिर पर श्रावण माह में लगी भक्तों की भीड़, मास के हर दिन होती हैं विशेष पूजा..

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रायसेन।मप्र के रायसेन जिले में प्राचीन शिव मंदिर भोजपुर में श्रावण माह को भक्तों की उमडी भीड़ मास के हर दिन यहा विशेष पूजन कि जाती हैं। इस दौरान विश्व प्रसिद्द शिवलिंग मंदिर भोजपुर में भक्तो का ताँता लगा रहता हैं । यहा भोपाल सहित आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में भक्त आकर शिव आराधना करते हैं। पुरातत्व विभाग के आधीन इस प्राचीन मंदिर पर लोगों की विशेष आस्था है कि यहाँ श्रावण मास में पूजा अर्चना करने से उनकी हर मनोकामना पूरी होती है। इस कारण यहा देश भर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है।

एक रात में पांडवों ने किया था इसका निर्माण..!!

मध्‍य प्रदेश में कई ऐसी ऐतिहासिक धरोहर मौजूद हैं जिनके ख्‍याति विश्‍व विख्‍यात है. इन्‍हीं में से राजधानी भोपाल से 32 किलो मीटर दूर स्तिथ भोजेश्वर मंदिर एक है. कहा जाता है कि यहां पर मौजूद शिवलिंग दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है. भोजपुर और इस शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज (1010 ई–1055 ई) ने करवाया था. लोग इस मंदिर को अधूरा मंदिर के नाम से भी जानते हैं। रायसेन जिले के भोजपुर गांव में स्थित भोलेनाथ के इस मंदिर के अधूरे रहने के पीछे एक कहानी है. लेकिन इसके वास्‍तविक तथ्‍यों का पता किसी को नहीं है. पौराणिक किवदंतियों की मानें तो कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कार्य एक रात में पूरा किया जाना था, लेकिन कारीगर यह काम पूरा नहीं कर सके. इसलिए यह मंदिर आज तक अधूरा ही है और इसका फिर से निर्माण नहीं करवाया गया. मंदिर से जुड़े कई सवाल भी अधूरे ही रह गए जिनका जवाब आजतक किसी के पास नहीं है।


– रायसेन जिले के भोजपुर का भोजपुर मंदिर 11 सदी से 13 वीं सदी की मंदिर वास्तुकला का एक अद्वितीय उदाहरण है।अगर यह मंदिर पूर्णरूप से निर्मित होता तो पुराने भारत का अपनी तरह का एक आश्चर्य होता है। मंदिर का पूरी तरह भराहुआ नक्काशीदार गुम्बद और पत्थर की संरचनाएं, जटिल नक्काशी से तैयार किये गए प्रवेश द्वार और उनके दोनों तरफ उत्कृष्टता से गढ़ी गई आकृतियाँ देखने वालों का स्वागत करती हैं।मंदिर की बालकनियों को विशाल कोष्ठक और खंभों का सहारा दिया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारों और ढाँचे को कभी बनाया ही नहीं गया। मंदिर को गुंबद के स्तर तक बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया गया मिट्टी का रैम्प अभी तक दिखाई पड़ता है, जो हमें इमारत निर्माण कला (चिनाई) में पुरातन बुद्धिमत्ता का स्वाद चखाता है।भोजपुर, बलुआ पत्थर की रिज जो मध्य भारत की विशेषता है, पर स्थित 11 वीं सदी का एक शहर है। यह मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। बेतवा नदी पुनः बनाए गए इस प्राचीन शहर के पास बहती है जो भोजपुर पर्यटन में पुरानी दुनिया के आकर्षण का समावेश करती है। भोजपुर का यह नाम परमार राजवंश के सबसे शानदार शासक राजा ‘भोज’ के नाम पर रखा गया था। उनके शासनकाल के तहत बिना तराशे हुए बड़े पत्थरों की इमारत बनाने की एक प्राचीन शैली द्वारा (विशाल चिनाई) द्वारा निर्मित यह बांध अवश्य देखे जाने वाले स्थानों में से एक है चाहे आप अचानक पहुँचने वाले पर्यटक हों या फिर वास्तुकला के पुजारी। . भोजपुर और उसके आसपास के पर्यटक स्थल भोजेश्वर मंदिर को पूर्व के सोमनाथ के नाम से भी जाना जाता है जो भारत की उन अद्भुत संरचनाओं वाली इमारतों में से एक है, जिसे एक बार ज़रूर देखा जाना चाहिए।

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