उदयपुरा रायसेन। निकटवर्ती ग्राम निवाड़ी में श्री रामचरित मानस विद्यापीठ द्वारा संचालित संत, ग्रंथ, संदेश ,मानस यात्रा के पहुंचने पर आयोजक राजाराम रघुवंशी एवं ग्राम वासियों का द्वारा विद्वानों का तिलक पुषप भेंट कर सम्मान किया, श्री राम जानकी मंदिर पर आयोजित कार्यक्रम में सत्संग सभा का आयोजन हुआ।
जिसमें भोपाल से मानस भारती के संपादक देवेंद्र रावत ने मानस के प्रसंग लक्ष्मण परशुराम संवाद पर व्याख्या करते हुए बताया कि, क्रोध पाप का मूल है, इसके बस में होकर मनुष्य अनुचित कार्य कर बैठते हैं, और विश्व भर में प्रतिकूल चलकर सबका अहित करते हैं, लेकिन समदर्शी, सुशील, धीर और ज्ञानी,श्रेष्ठ जन अपने क्रोध का सदुपयोग करते हुए, व्यक्ति और समाज के कल्याण के लिए कार्य करते हैं ,भगवान परशुराम ने अपने क्रोध से दुष्ट ,अत्याचारी और अन्यायी राजाओं को नष्ट किया, प्रसंग की व्याख्या को आगे बढ़ते हुए ,धर्माधिकारी राजेंद्र शास्त्री ने बताया कि क्रोध आने पर उसके परिणाम पर विचार किया जाए तो क्रोध काबू में आ जाता है।
राष्ट्रीय कथाकार रामनरेश शास्त्री, नर्मदा प्रसाद रामायणी ,हरिदास संगीता चारी, अमरनाथ बिल्थरिया ,ने प्रसंग की सुंदरतम व्याख्याएं प्रस्तुत की, राष्ट्रीय कवि गोविंद गोदानी द्वारा शारदीय नवरात्र स्थापना दिवस पर देवी भजन प्रस्तुत कर सभी को भाव विभोर किया ।

मानस यात्रा संयोजक वरिष्ठ अधिवक्ता चतुरनारायण रघुवंशी ने मानस प्रवक्ता, मानस सुमन जी महाराज की साधना स्थली हनुमान मंदिर रानी पिपरिया में आयोजित होने वाले जन्मशताब्दी महोत्सव की रूपरेखा से अवगत कराते हुए , मानस प्रेमी जनों ,का आभार व्यक्त किया, मानस ग्रंथ की मंगल आरती में माधव सिंह, बलदेव सिंह, रामसेवक रघुवंशी,खुमान सिंह, जालम सिंह राजपूत, रूप सिंह ,अरुण कुमार उदेनिया, वीरेंद्र सिंह पटेल, नर्मदा प्रसाद धाकड़, लोकेंद्र सिंह, हनुमत कुशवाहा, सूरत सिंह मेहरा, सहित बड़ी संख्या में मानस प्रेमी जनों ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया,