रोज 15 हजार वाहन गुजरते हैं; गड्ढों में फंसे पहिए, बाहर निकले सरिए और झुकी रेलिंग दे रही बड़े हादसे को न्योता
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल-विदिशा स्टेट हाईवे-18 पर दिल्ली-मुंबई मुख्य रेलवे लाइन के ऊपर बना करीब एक किलोमीटर लंबा रेलवे ओवरब्रिज इन दिनों बदहाली और लापरवाही की तस्वीर बना हुआ है। वर्ष 2013 में यातायात के लिए खोला गया यह पुल महज 13 साल में जगह-जगह जर्जर हो चुका है। पुल पर गड्ढे, धंसाव, टूटता फुटपाथ, झुकी रेलिंग और बाहर निकले लोहे के सरिए हादसे को न्योता दे रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस मार्ग से रोजाना करीब 15 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं।
पुल की हालत ऐसी है कि दोनों ओर करीब 600 मीटर हिस्से में सड़क बुरी तरह उखड़ चुकी है। कई जगह 8 से 10 इंच तक गहरे गड्ढे हो गए हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए ये गड्ढे सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं। वाहन का संतुलन बिगड़ने पर हादसे की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले वर्षों में इस क्षेत्र में कई हादसे हो चुके हैं और एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत की बात सामने आ रही है।
निर्माण के समय ही उठे थे सवाल, तकनीकी चेतावनी पर भी नहीं हुआ अमल
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से मध्यप्रदेश ब्रिज कॉर्पोरेशन ने ओवरब्रिज का निर्माण शुरू कराया था। वर्ष 2013 में पुल को यातायात के लिए खोल दिया गया। निर्माण के दौरान तत्कालीन एसडीओ द्वारा क्षेत्र की ब्लैक कॉटन सॉइल यानी काली कपासी मिट्टी को देखते हुए पिलरों की गहराई को लेकर आपत्ति जताए जाने की बात कही जा रही है।
बताया जाता है कि कम गहराई वाले पिलरों को लेकर तकनीकी स्तर पर चेतावनी दी गई थी। हालांकि इस दावे से संबंधित मूल दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने आना अभी बाकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उस समय उठाई गई तकनीकी आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। आज पुल पर दिखाई दे रहा धंसाव और क्षरण उन्हीं आशंकाओं को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

पैचवर्क से नहीं सुधरी हालत, पुल पर निकल आए सरिए
पुल पर कई जगह कंक्रीट टूट चुकी है। लोहे के सरिए बाहर दिखाई दे रहे हैं। फुटपाथ क्षतिग्रस्त होकर मलबे में तब्दील हो चुका है। रेलिंग कई स्थानों पर टेढ़ी हो गई है। सड़क पर हुए गहरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों को लगातार खतरा बना रहता है। 40 किलोमीटर मार्ग पर कई जगह 8 से 10 इंच गहरे गड्ढे भरे हुए हैं लेकिन एमपी आरडीसी द्वारा उनको नहीं भरा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्षों में कई बार पैचवर्क और अस्थायी मरम्मत कराई गई, लेकिन समस्या स्थायी रूप से दूर नहीं हुई। उनका आरोप है कि पुल की मूल संरचना की व्यापक जांच और स्थायी सुधार के बजाय बार-बार सतही मरम्मत पर जोर दिया गया।
कुछ दिन पहले कार खाई में गिरी, टला बड़ा हादसा
कुछ दिन पहले ही रेलवे ओवरब्रिज के समीप एक कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी थी। हादसे में चालक को मामूली चोट आई। स्थानीय लोगों के अनुसार यह पहला हादसा नहीं है। पुल और इसके दोनों ओर खराब सड़क के कारण पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
नीचे से गुजरती हैं दिल्ली-मुंबई रेल लाइन की ट्रेनें
इस ओवरब्रिज की स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसके नीचे देश के व्यस्ततम रेल मार्गों में शामिल दिल्ली-मुंबई मुख्य रेलवे लाइन गुजरती है। पुल से भारी वाहन लगातार गुजरते हैं। स्थानीय लोगों की चिंता है कि यदि कोई भारी वाहन गड्ढे में फंसकर अनियंत्रित होता है और क्षतिग्रस्त रेलिंग को तोड़ देता है, तो गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।ऐसे में पुल की संरचनात्मक स्थिति की तकनीकी जांच कराना और कमजोर हिस्सों की तत्काल मरम्मत करना जरूरी है।
वीआईपी रूट, फिर भी नहीं सुधरी तस्वीर
भोपाल-विदिशा हाईवे-18 महत्वपूर्ण मार्ग होने के साथ ही जनप्रतिनिधियों और वीआईपी आवाजाही वाला रास्ता भी है। केंद्रीय कृषि मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई जनप्रतिनिधियों का इस मार्ग से आवागमन होता है। इसके बावजूद पुल की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
ग्रामीणों ने कहा—बड़ी दुर्घटना का इंतजार न करे सरकार
दीवानगंज सरपंच गिरजेश नायक ने कहा कि पुल की गुणवत्ता को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। कुछ वर्षों में ही पुल पर गैप, धंसाव और रेलिंग की समस्या सामने आने लगी। पुल पर कई हादसे हो चुके हैं। सरकार को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किए बिना इसकी जांच और स्थायी मरम्मत करानी चाहिए।
समाजसेवी कौशल बैरागी और मुकेश साहू ने कहा कि हाईवे पर भारी यातायात है। पुल बनने के कुछ समय बाद ही इसमें दरारें दिखाई देने लगी थीं। वर्तमान में गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालक परेशान हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गंभीर हादसा हो सकता है।
उच्च स्तरीय तकनीकी जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री, लोक निर्माण विभाग, मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) और रेलवे से मांग की है कि रेलवे ओवरब्रिज का तत्काल स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कराया जाए। पुल के पिलर, स्लैब, जॉइंट, रेलिंग और सड़क की तकनीकी स्थिति की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए।
नागरिकों ने निर्माण और रखरखाव में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। साथ ही पुल की स्थिति गंभीर पाए जाने पर भारी वाहनों के आवागमन के संबंध में भी विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर तत्काल सुरक्षा कदम उठाने की मांग की है।
सवाल अब यह है कि रोजाना हजारों वाहनों और नीचे से गुजरती ट्रेनों के बीच इस जर्जर पुल की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा या उससे पहले पुल की तकनीकी जांच कराकर स्थायी समाधान किया जाएगा?