– नई पीढ़ी की तालीम, समाज सुधार, कौमी एकता और सादगीपूर्ण निकाह पर दिया गया विशेष जोर
– मुफ़्ती मासूम साक़िब ने युवाओं को सादगीपूर्ण निकाह और समाज सेवा का दिलाया संकल्प,
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
रविवार सात जून बाद नमाज़ ईशा जमीयत उलेमा-ए-हिंद जिला रायसेन की बम्होरी इकाई के तत्वावधान में कस्बा बम्होरी में “इस्लाह-ए-मुआशरा व इत्तिहाद-ए-मिल्लत” विषय पर एक विशाल धार्मिक, सामाजिक एवं सुधारात्मक जलसे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से आए उलेमा-ए-कराम, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जमीयत पदाधिकारियों, युवाओं एवं आमजन की बड़ी तादात में शिरकत की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जमीयत उलेमा-ए-हिंद, नई दिल्ली के नाज़िम-ए-उमूमी मौलाना मुफ़्ती मासूम साक़िब साहब की मौजूद रहे। जलसे की अध्यक्षता जमीयत उलेमा-ए-हिंद मध्यप्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुफ़्ती अहमद खान साहब ने की। विशेष अतिथि के रूप में मौलाना अब्दुल क़दीर क़ासमी साहब ने जलसे की सरपरस्ती मौलाना अतीकुर्रहमान साहब मज़ाहिरी गढ़ी ने की।
नई पीढ़ी की तर्बियत आज की सबसे बड़ी चुनौती : मुफ़्ती मासूम साक़िब
अपने विस्तृत और प्रभावशाली संबोधन में मौलाना मुफ़्ती मासूम साक़िब ने कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण विषय नई पीढ़ी की सही तालीम और तर्बियत है। उन्होंने कहा कि समाज में धार्मिकता और नैतिक मूल्यों की जो विरासत आज दिखाई दे रही है, वह उलेमा, मदरसों, मसाजिद और सामाजिक संस्थाओं की वर्षों की मेहनत का परिणाम है, लेकिन आने वाली पीढ़ी को सही दिशा देना आज सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन और आधुनिक तकनीक अपने आप में एक बड़ी नेमत हैं। यदि उनका उपयोग शिक्षा, ज्ञान, व्यापार, रोजगार और मानव सेवा के लिए किया जाए तो वे समाज के विकास का माध्यम बन सकते हैं, लेकिन यदि उनका उपयोग नफरत फैलाने, अफवाहें फैलाने, लोगों को परेशान करने, साइबर अपराध या अन्य गलत कार्यों के लिए किया जाए तो उनका नुकसान अत्यंत गंभीर हो सकता है।
मुफ़्ती साहब ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद पूरे देश में शिक्षा, राहत कार्य, कानूनी सहायता, समाज सुधार और मानव सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि संगठन बेगुनाह लोगों को न्याय दिलाने, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और जरूरतमंदों की सहायता के लिए निरंतर प्रयासरत है।

समाज सुधार किसी एक समुदाय नहीं, पूरे देश की आवश्यकता
मुफ़्ती मासूम साक़िब ने कहा कि “इस्लाह-ए-मुआशरा” केवल मुसलमानों का विषय नहीं बल्कि पूरे समाज की आवश्यकता है। व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र का निर्माण होता है। यदि व्यक्ति का चरित्र बेहतर होगा तो परिवार मजबूत होगा और जब परिवार मजबूत होंगे तो समाज और देश भी मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि आज आधुनिक जीवनशैली ने पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को कमजोर किया है। ऐसे समय में समाज सुधार, नैतिक मूल्यों की रक्षा और मानवीय संबंधों को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।
इत्तिहाद-ए-मिल्लत और राष्ट्रीय एकता समय की सबसे बड़ी जरूरत
मुफ़्ती मासूम साक़िब ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और बहुधार्मिक देश है, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का आपसी एकता के साथ-साथ हिंदू, सिख, ईसाई एवं अन्य सभी समुदायों के साथ भाईचारे और सद्भाव के संबंध बनाए रखना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जब समाज के सभी वर्ग प्रेम, सहयोग और सम्मान के साथ रहेंगे तभी देश वास्तविक अर्थों में प्रगति करेगा। उन्होंने कुरआन की शिक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि अच्छे कार्यों में एक-दूसरे का सहयोग करना और बुराइयों से दूर रहना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

युवाओं को सादा निकाह और समाज सेवा का दिलाया संकल्प
जलसे का सबसे प्रेरणादायक और भावनात्मक क्षण तब आया जब मौलाना मुफ़्ती मासूम साक़िब ने उपस्थित युवाओं को खड़े होकर सादगीपूर्ण निकाह का संकल्प दिलाया।
उन्होंने कहा कि इस्लाम में सबसे बरकत वाला निकाह वही है जिसमें दिखावा और फिजूलखर्ची कम हो। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने निकाह और वलीमे को सादगी के साथ सम्पन्न करें तथा अनावश्यक खर्च से बची राशि को यतीमों, विधवाओं, जरूरतमंद विद्यार्थियों, बीमारों और गरीब परिवारों की सहायता में खर्च करें।मुफ़्ती साहब के आह्वान पर बड़ी संख्या में युवाओं ने खड़े होकर हाथों में हाथ डालकर यह संकल्प लिया कि वे अपने विवाह को सादगीपूर्ण बनाएंगे और समाज सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएंगे।
इस्लाह-ए-मुआशरा और इंसानियत का संदेश दिया : मौलाना अतीकुर्रहमान मजाहिरी गढ़ी
कार्यक्रम के संरक्षक मौलाना अतीकुर्रहमान मजाहिरी ने कहा कि समाज में बढ़ती नैतिक चुनौतियों और पारिवारिक विघटन को रोकने के लिए धार्मिक एवं सामाजिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।उन्होंने कहा कि इस्लाम इंसानियत, भाईचारे, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देता है। समाज तभी मजबूत होगा जब हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों को समझते हुए दूसरों के अधिकारों का सम्मान करेगा।उन्होंने युवाओं से नैतिक मूल्यों को अपनाने, बड़ों का सम्मान करने तथा समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया।
आत्मसुधार से ही समाज में बदलाव संभव मौलाना अब्दुल क़दीर क़ासमी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नाज़िम तंजीम मौलाना अब्दुल क़दीर क़ासमी ने कहा कि समाज परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति के आत्मसुधार से होती है। जब व्यक्ति अपने चरित्र, व्यवहार और विचारों को सुधार लेता है तो उसके परिवार और समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगता है।
उन्होंने युवाओं को ईमानदारी, अच्छे आचरण, नैतिकता और समाज सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की नसीहत दी। साथ ही जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा संचालित सामाजिक, कानूनी और राहत कार्यों की जानकारी भी दी।
आज़ादी की लड़ाई में उलेमा की कुर्बानियां इतिहास का गौरव : मुफ़्ती अहमद खान
जलसे की अध्यक्षता कर रहे जमीयत उलेमा-ए-हिंद मध्यप्रदेश के अध्यक्ष मौलाना मुफ़्ती अहमद खान ने कहा कि भारत की आज़ादी की लड़ाई में उलेमा-ए-कराम और जमीयत उलेमा-ए-हिंद का योगदान इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है।
उन्होंने कहा कि हजारों उलेमा ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए जेलों की यातनाएं झेलीं और अनेक लोगों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को इन महान कुर्बानियों से परिचित कराना समय की आवश्यकता है ताकि उनमें देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, इंसानियत और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।उन्होंने समाज में अमन, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया।

रायसेन जिले में शिक्षा, राहत और समाज सेवा के अनेक कार्य
जमीयत उलेमा-ए-हिंद जिला रायसेन के अध्यक्ष मौलाना हामिद खान क़ासमी ने संगठन की वार्षिक गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि जिला इकाई शिक्षा, राहत कार्य, कानूनी सहायता, समाज सुधार और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय है।उन्होंने बताया कि गरीब विद्यार्थियों को शैक्षणिक सहयोग, जरूरतमंदों को कानूनी मार्गदर्शन, चिकित्सा सहायता तथा सामाजिक उत्थान के विभिन्न कार्यक्रम निरंतर संचालित किए जा रहे हैं।
तहसील स्तर पर भी जारी हैं जनसेवा और जागरूकता के कार्य
बम्होरी तहसील के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल वाजिद साहब ने बताया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा जन्म प्रमाण-पत्र बनवाने, सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, गरीब बच्चियों के विवाह में सहयोग, शिक्षा एवं चिकित्सा सहायता, नशामुक्ति अभियान तथा सामाजिक विवादों के समाधान जैसे जनहितकारी कार्य निरंतर किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि विभिन्न गांवों का दौरा कर लोगों को जागरूक करने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास जारी हैं।
बड़ी संख्या में लोगों की रही सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन मुफ़्ती शकील अहमद वाजिदी ने किया। जलसे में जिले भर से आए उलेमा-ए-कराम, जमीयत पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, नौजवान एवं आमजन हज़ारों की संख्या में लोगों ने शिरकत की ।
आख़िर में जमीयत उलेमा कस्बा बम्होरी के सदर मौलवी अकरम साहब ने सभी अतिथियों, उलेमा-ए-कराम, जिम्मेदारान और उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन देश, प्रदेश और समाज में अमन, भाईचारे, शिक्षा, तरक्की और खुशहाली की विशेष दुआ के साथ हुआ।