उदयपुरा रायसेन।मन के मोह, बुद्धि के भ्रम, चित् के संशय,को नष्ट करती है राम कथा- रसाचार्य विष्णु दत्त उदयपुरा- समीपस्थ ग्राम चिकली में आयोजित पंचदिवसीय, श्री रामचरितमानस सम्मेलन के विश्राम दिवस पर आयोजित राम कथा श्रवण कराते हुए रामचरितमानस विद्यापीठ के राष्ट्रीय प्रवक्ता रसाचारय पंडित विष्णु दत्त शास्त्री ने अपनी संगीत मय सुमधुर वाणी से राम कथा की व्याख्या करते हुए बताया, कि व्यक्ति के मन में मोह व्याप्त है, एवं बुद्धि में भ्रम पैदा हो चुका है, चित् में संशय की जड़ जमी हुई है, जिससे हम अज्ञानतापूर्ण जीवन जी रहे हैं, अति मोह के कारण हम पाप कर्म कर रहे हैं, और बुद्धि के भ्रम से ज्ञान और अज्ञान की पहचान नहीं कर पाते, हमारा चित्त संचय रूपी अज्ञानता में जल रहा है, इन सभी का उपाय प्रभु श्री राम की कथा का एकमात्र श्रवण ही है।

सम्मेलन के पूर्व सत्र में मानस विद्यापीठ आचार्य पंडित सुरेंद्र शास्त्री ने बताया कि रामचरितमानस सर्वोच्च भक्ति, ज्ञान, त्याग, बैराग, तथा सदाचार की शिक्षा देने वाला मानव मात्र के लिए सुलभ और सरल हिंदी भाषा का ग्रंथ है, जिसको पढ़कर, सुनकर, मानव मात्र नैतिक उत्थान कर, आत्म कल्याण को प्राप्त कर सकता है।

सम्मेलन की अध्यक्षता एवं संचालन जगदंबा उपासक सत्यनारायण शास्त्री ने की इस अवसर पर नर्मदा प्रसाद रामायणी, योगेश पांडे, सुदामा शास्त्री, मानस प्रवक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये, सम्मेलन में श्री रामचरितमानस विद्यापीठ के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता चतुर नारायण रघुवंशी ने, संत ग्रंथ संदेश, के माध्यम से सत्संग सेवा और सुमरन के महत्व को व्यक्त किया, जिससे प्रभावित होकर ग्राम के मानस प्रेमीजनो ने व्यसनमुक्त जीवन के साथ एक करोड़ भगवन्न राम नाम लेखन संग्रह कर नित्यानंद राम-नाम बैंक में जमा करने का संकल्प लिया।

सम्मेलन संयोजक संतोष पचौरी ने संतों एवं विद्वानों का सम्मान करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया, आरती पूजन, एवं प्रसाद के साथ मानस सम्मेलन का समापन हुआ,