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चंद्रगिरी में आचार्यश्री विद्यासागर जी के सपनो का भारत

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 सुरेंद्र जैन रायपुर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 130 किलो मीटर की दूरी पर स्थित पावन पवित्र धाम डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी में महातपस्वी दिगंबर जैनाचार्य विद्यासागर जी के सपनो का भारत नजर आता है.अपने जीवन के 78 साल की आयु में 56 साल तक कड़ी तपस्या करने वाले महातपस्वी समाधिस्थ आचार्यश्री विद्यासागर जी कहते थे कि “आ भारत में लोट चलें” जिससे उनका तात्पर्य था कि हम अपने उस गौरवशाली भारत में लोट चलें जो आत्मनिर्भर था जिसकी संस्कृति सभ्यता की दुनिया कायल थी जो अपराध मुक्त था.आचार्यश्री ने जो आत्मनिर्भर प्राचीन भारत की कल्पना की थी उसमें गौवंश से लेकर बालिका शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार अहिंसक वस्त्र आदि प्रमुख थे.आचार्यश्री ने अपने आत्मकल्याण के पथ पर चलते हुए देश के कई राज्यों में यह सार्थक करके दिखाया भी ओर भारत के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री बड़ी बड़ी राजनीतिक हस्तियों को समय समय पर मार्गदर्शन भी दिया.आचार्यश्री के आशीर्वाद से देश के कई राज्यों में धर्म संस्कार आधारित बालिका शिक्षा को लेकर प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ की स्थापना हुई जिसके अंतर्गत चंद्रगिरी सहित देशभर में कई प्रतिभास्थली संचालित हैं जहां बालिकाएं धर्म संस्कार के साथ शिक्षित होकर शासन प्रशासन में भी अच्छे पदों पर पहुंच रही हैं.आचार्यश्री कहते थे गाय बचेगी तभी देश बचेगा इसके लिए उन्होंने दयोदय पशु संरक्षण एवं संवर्धन केंद्र की स्थापना कराई जिसके अंतर्गत देशभर में डेढ़ सौ से अधिक गौशालाओं में हजारों गौवंश की सेवा हो रही है.वह भारत को आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे बेरोजगारों को स्वयं के रोजगार से लगाने उन्होंने चल चरखा हथकरघा की भी स्थापना की ओर देशभर के सैकड़ों चल चरखा हथकरघा केंद्र स्थापित कराए जहां सप्त ग्रामीणों को महिलाओं को हथकरघा से खादी बनाने का प्रशिक्षण देकर स्वयं के रोजगार से लगाया जा रहा है.भारत के प्राचीन आयुर्वेद को पुनर्जीवित करने उन्होंने पूर्णायु चिकित्सा एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना भी की जहां गंभीर से गंभीर बीमारी की आयुर्वेदिक औषधियां तैयार हो रही हैं.छप्पन साल तक आचार्यश्री विद्यासागर जी ने कड़ी तपस्या करते हुए स्वयं कभी शकर सहित सभी मीठे का त्याग रखा नमक तेल तला ड्राय फूड फल हरी सब्जियां आदि जीवन में कभी आहार में ग्रहण नहीं किया

.कड़ी तपस्या के मार्ग पर चलते हुए दो साल पहले छत्तीसगढ़ के चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में यम सल्लेखना पूर्वक उन्होंने देह का त्याग किया हाल ही में उनका द्वितीय समाधि दिवस चंद्रगिरी सहित देशभर में भक्ति भाव से मनाया गया जिसमें चंद्रगिरी में आयोजित समाधि दिवस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह भी सामिल हुए .चंद्रगिरी डोंगरगढ़ में एमपी टूडे ने आचार्यश्री के सपनो का भारत अपने कैमरे में कैद किया

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