छोटी-छोटी कन्या माता बहने अपने सर पर कलश रखकर कथा स्थल पर पहुंची
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाली पंचायत जमुनिया के गांव कयामपुर में रविवार को श्रीमद् भागवत कथा से पहले भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में छोटी-छोटी कन्याएं, माता, बहने और आसपास गांव के श्रद्धालु सम्मिलित हुए कलश यात्रा श्री राम ,राधा कृष्ण हनुमान मंदिर से कालीटोल मैया, सिद्ध बाबा, ठाकुर बाबा और ग्वाल बाबा, भैरो बाबा, गांव के मुख्य मार्ग से होते हुए कथा स्थल पर पहुंची।
कथा स्थल पर कथा वाचक आनंद कृष्ण शास्त्री ने बताया कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति नहीं, बल्कि आत्मज्ञान और वैराग्य के माध्यम से भगवान की भक्ति की ओर अग्रसर होना है। ज्ञान मनुष्य को सत्य का बोध कराता है, जबकि वैराग्य संसार के मोह–माया से मुक्त होने का मार्ग दिखाता है। जब ज्ञान और वैराग्य दोनों साथ होते हैं, तभी भक्ति सुदृढ़ होती है और व्यक्ति जीवन के दुख–सुख से ऊपर उठकर ईश्वर की शरण में जाता है।
ज्ञान और वैराग्य तो भक्ति के पुत्र हैं । भक्ति के आने पर ज्ञान और वैराग्य स्वत: आ जाते हैं, ज्ञान निष्ठा से ही वैराग्य होता है जब हम संसार का सत्य जान लेते हैं जब हमें सत्य और असत्य का ज्ञान हो जाता है तब हमें मिथ्या वस्तुओं से वैराग्य हो जाता है और सत्य में प्रीती हो जाती है, यही ज्ञान और वैराग्य हमें उच्च स्तर का अधिकारी बनाता है जिस पर हम तब ही पहुंच सकते हैं जब हम ब्रह्म ज्ञान में स्थिर रहें। मन चंचल होता है यह डांवाडोल हो सकता है इसीलिए केवल शाब्दिक ज्ञान पर्याप्त नहीं पहले भगवान की भक्ति फिर भगवान पर विश्वास और भक्ति में होने वाले अनुभव के कारण होने वाली ज्ञान निष्ठा और वैराग्य यह सब धीरे धीरे एक-एक करके भक्तों में खुद ब खुद आता चला जाता है ।