– बिजली कंपनी व किसान संगठन कार्यकर्ता की मोबाइल बातचीत का ऑडियो चर्चा में
– बकाया राशि का हवाला देकर की गई कार्रवाई, ऑडियो को लेकर आरोप–प्रत्यारोप
सैयद मसूद अली पटेल गैरतगंज रायसेन
जिले की गैरतगंज तहसील क्षेत्र के दस गांवों में बिजली कंपनी द्वारा बिजली आपूर्ति बंद किए जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बिजली कटौती से जहां किसानों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हुई है, वहीं गांवों में अंधेरा छा गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिजली कंपनी के अधिकारी और किसान संगठन के एक कार्यकर्ता के बीच मोबाइल पर हुई बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और गरमा गया है।
जानकारी के अनुसार दो दिन पूर्व बिजली कंपनी गैरतगंज द्वारा जुझारपुर, मुरली, बंडोली, अगरिया कलां, जैतपुर, उड़दमऊ, चांदोनी गढ़ी, बिलवानी, भंवरगढ़, सीहोरा कला सहित अन्य गांवों में बकाया बिजली बिल जमा न होने का हवाला देते हुए विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई। अचानक बिजली कटने से किसानों की फसलों की सिंचाई रुक गई, वहीं ग्रामीणों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कटौती के बाद स्थानीय किसानों ने किसान संगठन के कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी दी। इसके बाद किसान संगठन के कार्यकर्ता गगन गौर ने दो दिन पहले देर शाम बिजली कंपनी के जेई शैलेष पटेल से मोबाइल पर बातचीत की। इस दौरान जेई द्वारा किसी वरिष्ठ अधिकारी से भी बात कराए जाने की बात सामने आई, जिसमें दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। उक्त बातचीत की ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जो अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।
किसान संगठन के कार्यकर्ता गगन गौर ने आरोप लगाया है कि बातचीत के दौरान बिजली कंपनी के अधिकारियों ने संवेदनहीनता दिखाते हुए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं बिजली कंपनी के जेई शैलेष पटेल एवं डीई पराग घावरे का कहना है कि वायरल ऑडियो को एडिट कर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि यह ग्रामीणों को भ्रमित करने का प्रयास है और बिजली कटौती की कार्रवाई अधिक बकाया राशि के कारण नियमानुसार की गई है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि बिजली कटौती से किसान सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। अब देखना होगा कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं। उधर किसान संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई और कथित रूप से हठधर्मी रवैया अपनाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।