रंजीत गुप्ता शिवपुरी
कहते हैं कि माता-पिता के संस्कार उनकी संतान के कर्मों में झलकते हैं। इसी चरितार्थ को सिद्ध करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह रघुवंशी (जीतू) ने अपनी पूज्य माताजी स्वर्गीय हीरा रघुवंशी जी की छठवीं पुण्यतिथि को आडंबरों के बजाय ‘सेवा-संकल्प’ के रूप में मनाया। रघुवंशी परिवार द्वारा आयोजित इन सेवा कार्यों ने समाज के सामने संवेदनशीलता और करुणा का एक अनुपम उदाहरण पेश किया है।
भोजन वितरण से लेकर गौ-सेवा तक का संकल्प
श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की शुरुआत माधव चौक स्थित हनुमान मंदिर पर जरूरतमंदों को भोजन कराकर की गई। इसके बाद जिला चिकित्सालय की कल्याणी धर्मशाला में मरीजों के परिजनों को गरिष्ठ भोजन कराया गया। सेवा का यह कारवां यहीं नहीं थमा; दोपहर में सतनवाड़ा-नरवर रोड स्थित आदिवासी बस्ती में पहुँचकर रघुवंशी परिवार ने महिलाओं को ठंड से बचाव के लिए कंबल, बच्चों को टोपी और सभी को भोजन वितरित किया। बच्चों की मुस्कान ने इस श्रद्धांजलि को और भी सार्थक बना दिया।
मूक पशुओं और आध्यात्म का संगम
शाम के समय बाणगंगा रोड स्थित गौशाला में गायों के लिए हरा चारा, गुड़ और दलिया की व्यवस्था की गई, साथ ही श्वानों को दूध-ब्रेड खिलाया गया। धार्मिक पक्ष को जोड़ते हुए महिला टीम द्वारा बाबा गोरखनाथ मंदिर में विशेष श्रृंगार भी किया गया।
संस्कारों की जीवंत तस्वीर
इस पुनीत कार्य में हरेन्द्र, वीरेन्द्र, गजेन्द्र, मुकेश रघुवंशी सहित पौत्र सूर्यप्रताप और रोहित रघुवंशी ने सहभागिता की। उपस्थित मित्रों और गणमान्य नागरिकों ने कहा कि रघुवंशी परिवार द्वारा जरूरतमंदों और मूक पशुओं की सेवा करना वास्तव में माँ को दी गई सबसे श्रेष्ठ श्रद्धांजलि है। यह आयोजन समाज को प्रेरित करता है कि हम अपनी व्यक्तिगत स्मृतियों को लोक-कल्याण से कैसे जोड़ सकते हैं।