– दूसरे दिन सुखदेव जी के जन्म की कथा का वर्णन किया गया
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर स्थित डोलाघाट हनुमान मंदिर पर चल रही श्री रामचरितमानस एवं भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक साध्वी राधिका कुमारीें ने सुखदेव के जन्म का वर्णन करते हुए कहा कि नारद जी के कहने पर पार्वती जी ने भगवान शिव से पूछा कि उनके गले में जो मुंडमाला है वह किसकी है तो भोलेनाथ ने बताया वह मुंड किसी और के नहीं बल्कि स्वयं पार्वती जी के हैं। हर जन्म में पार्वती जी विभन्निा रूपों में शिव की पत्नी के रूप में जब भी देह त्याग करती शंकर जी उनके मुंड को अपने गले में धारण कर लेते पार्वती ने हंसते हुए कहा हर जन्म में क्या मैं ही मरती रही, आप क्यों नहीं।

शंकर जी ने कहा हमने अमर कथा सुन रखी है पार्वती जी ने कहा मुझे भी वह अमर कथा सुनाइए शंकर जी पार्वती जी को अमर कथा सुनाने लगे। शिव-पार्वती के अलावा सर्फि एक तोते का अंडा था जो कथा के प्रभाव से फूट गया उसमें से श्री शुकदेव जी का प्राकट्य हुआ कथा सुनते सुनते पार्वती जी सो गई। वह पूरी कथा श्री शुकदेव जी ने सुनी और अमर हो गए शंकर जी सुखदेव जी के पीछे उन्हें मृत्युदंड देने के लिए दौड़े। शुकदेव जी भागते भागते व्यास जी के आश्रम में पहुंचे और उनकी पत्नी के मुंह से गर्भ में प्रवष्टि हो गए। 12 वर्ष बाद श्री शुकदेव जी गर्व से बाहर आए इस तरह श्री शुकदेव जी का जन्म हुआ।