आलेख
अरुण पटेल
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर ग्रोथ समिट की नींव रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि मध्यप्रदेश में रुपया बोकर करोड़ों कमाये जा सकते हैं। इस प्रकार उन्होंने दो लाख करोड़ रुपये के निवेश से अभ्युदय मध्यप्रदेश का आगाज किया। दूसरी ओर कांग्रेस पांच जनवरी से मनरेगा बचाओ अभियान के तहत सड़कों पर उतर कर संघर्ष करने वाली है। इस प्रकार एक ओर जहां अमित शाह मध्यप्रदेश से कांग्रेस का बचा-खुचा जनाधार छीन कर भाजपा की झोली में डालने के लिए कृत संकल्पित हो गये हैं तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस मनरेगा को मुद्दा बनाकर गरीब मजदूरों को अपने साथ जोड़कर अपने खिसकते जनाधार को मजबूती देने के लिए मैदान में उतरने जा रही है। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने कहा कि यह समिट प्रदेश सरकार के संकल्प को आगे बढ़ायेगी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में अहम् योगदान दे रहा है। राजमाता की नगरी और अटलजी की कर्मभूमि ग्वालियर से जो सौगात मिलने जा रही है वह वास्तव में साढ़े आठ करोड़ लोगों के लिए है। गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 35 साल की नक्सल समस्या खत्म हो गयी है और इसी माह 11 दिसम्बर को लाल सलाम को अंतिम सलाम दिया गया।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में 2.17 लाख करोड़ रुपये की लागत से औद्योगिक/निर्माण इकाइयों का भूमिपूजन किया। अमित शाह का जोर इस बात पर था कि मैन्यूफैक्चरिंग रिन्यूवल इनर्जी एग्री प्रोसेसिंग और आईटी व इंफ्रा स्ट्रक्चर के क्षेत्र में नई औद्योगिक परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है, इससे लगभग दो लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा। इस प्रकार प्रदेश निवेश और औद्योगिक विकास का नया केन्द्र बन रहा है। मध्यप्रदेश का भौगोलिक परिदृश्य इतना समृद्ध है कि यहां निवेश लाभदायक ही होगा। शाह ने उद्योगों व एमएसएमई इकाइयों को सशक्त बनाने के लिए 610 इकाइयों को 775 करोड़ रुपया निवेश प्रोत्साहन सहायता भी बांटी। कांग्रेस को निशाने ने पर लेते हुए शाह ने कहा कि दिग्विजय सिंह के शासनकाल में प्रदेश की गिनती बीमारु राज्यों में होती थी परन्तु भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने इस टेग को हटाकर राज्य को विकास की राह पर अग्रसर किया और अब मोहन यादव प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।

पांच जनवरी से कांग्रेस उतरेगी सड़कों पर
कांग्रेस नये साल का आगाज 5 जनवरी से मनरेगा बचाओ अभियान के रुप में करने जा रही है। यह ऐलान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कार्यसमिति की तीन घंटे चली बैठक के बाद किया। उनका दावा था कि कृषि कानूनों की तरह मनरेगा को बचाने के लिए भी जन-आंदोलन होगा और देश भर में रैलियां और जनसभायें आयोजित होंगी। कार्यसमिति की बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के तेवर काफी तल्ख थे और उन्होंने सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने निशाने पर लेते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अकेले ही इस योजना को खत्म कर दिया। बिहार के विधानसभा चुनाव में करारी पराजय के बाद कांग्रेस कार्यसमिति की पहली बैठक में कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा को हर हाल में बचाने की शपथ ली। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हुए हमले की निंदा करते हुए खरगे ने कहा कि इससे भारत की छवि प्रभावित हुई है। एसआईआर प्रक्रिया पर उनका कहना था कि यह एक गंभीर मुद्दा है और लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार को सीमित करने का प्रयास है। मध्यप्रदेश कांग्रेस अपने खिसकते जनाधार को बचाने के लिए संगठन सृजन अभियान का तीसरा चरण नये साल के सूर्योदय के साथ करने जा रही है और यह अभियान एक जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक चलेगा। इसमें मंडल, पंचायत और वार्ड समितियों का गठन होगा। जब यह समितियां बन जायेंगी उसके बाद गांव चलो-बूथ चलो संपर्क कार्यक्रम चलाया जायेगा। इससे गांव से कार्यकर्ता बूथ, बूथ से मंडल, मंडल से ब्लाक और ब्लाक से जिला स्तर तक पहुंचेगे तथा पार्टी के कार्यक्रम के साथ भाजपा सरकार की असफलाओं पर भी चर्चा करेंगे। यह कार्यक्रम हर छः माह में आयोजित किया जायेगा। इसके साथ ही साथ मतदाताओं का सत्यापन भी किया जायेगा। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह ने गांव-गांव चलाये जाने वाले कार्यक्रम की रुपरेखा प्रस्तुत की, उनका जोर इस बात पर था कि हमें आमजन से संपर्क बढ़ाना होगा, इसके लिए कार्यकर्ता बूथ तक पहुंचें और वहां रात्रि विश्राम करें। लोगों को अपनी बात बतायें और उनकी बात सुने। भाजपा सरकार की असफलताओं को तथ्यों के साथ रखें, यह क्रम लगातर चलते रहना चाहिये, इस पर आमसहमति भी बनी।

और यह भी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा जो एसआईआर कराई जा रही है उसमें वोटों की चोरी प्रमाणित हुई है। भाजपा को जिन सीटों पर जितने मतों से जीत मिली है उन विधानसभा क्षेत्रों में उससे अधिक नाम हटाये गये हैं और ऐसा लगभग 60 सीटों पर देखने को मिला है जो यह स्पष्ट करता है कि 2023 का विधानसभा चुनाव भाजपा ने वोट चोरी के माध्यम से जीता है। न्यायालय में जाना है या नही, हम सभी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि सरकार ऐसे नहीं बनेगी। यदि प्रदेश में कांग्रेस को अपनी सरकार बनाना है तो संगठन को बूथ स्तर तक जाना होगा तथा हर एक कार्यकर्ता को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए अभी से जुटना होगा।

-लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं
-सम्पर्क: 9425010804, 7999673990