सुनील सोन्हिया की रिपोर्ट
खजुराहो की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती पर 11 वा खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का भव्य आयोजन 16 दिसंबर से 22 दिसंबर 2025 तक सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह फेस्टिवल न केवल सिनेमा प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना, बल्कि कला, संस्कृति और विचारों के आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच भी साबित हुआ। इस वर्ष उक्त फेस्टिवल दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र एवं असरानी को समर्पित किया गया वहीं फिल्म जगत में 100 वर्ष पूर्ण करने वाले कलाकार व्ही शांताराम एवं गुरुदत्त को याद किया गया 9 टपरा टॉकीज का निर्माण किया गया जिनमें 7 टपरा टॉकीज में धर्मेंद्र, असरानी, व्ही शांताराम, गुरुदत्त की फिल्में दिखाई गई , एक टपरा टॉकीज में हॉलीवुड की फिल्म दिखाई गई तथा एक टपरा टॉकीज में नवोदित फिल्मकारों की फीचरफिल्म, शॉर्ट फिल्म एवं डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई नवोदित फिल्मकारों की सात दिनों में 102 फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई

इस फेस्टिवल के संस्थापक,आयोजक , अभिनेता राजा बुंदेला ने बताया इस प्रतिष्ठित आयोजन में भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकारों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रमुख रूप से अभिनेता अनुपम खेर, सौरभ शुक्ला अभिनेत्री पूनम ढिल्लो, अभिनेत्री सुष्मिता मुखर्जी,अभिनेत्री दीपशिखा नागपाल, सहित अनेक नामचीन कलाकारों ने फेस्टिवल की शोभा बढ़ाई। इनके साथ ही देश-विदेश से आए फिल्म निर्माता, निर्देशक, लेखक और सिनेमेटोग्राफर भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
फेस्टिवल की एक विशेष उपलब्धि यह रही कि International Film Festival of India (IFFI) की जूरी के सदस्यों ने लगातार सात दिनों तक सहभागिता की और विभिन्न सत्रों, स्क्रीनिंग्स व संवाद कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई। इससे फेस्टिवल की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता और अधिक सशक्त हुई।

संस्कृति और लोककलाओं का उत्सव
फेस्टिवल के दौरान भारत के सभी प्रांतों से आए कलाकारों ने अपने-अपने लोक नृत्य और लोक संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। इसके अलावा मुंबई से आमंत्रित प्रोफेशनल डांस ग्रुप और ऑर्केस्ट्रा ने गीत-संगीत व नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हर संध्या सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रही, जिसमें परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम देखने को मिला
खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के दौरान एक टपरा टॉकीज में सातों दिन आपातकालीन दौर की इमरजेंसी प्रताड़ना एवं मीसाबंदी विषय पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर मीसा बंदियों को क्षत्रसाल गौरव सम्मान से सम्मानित भी किया गया।
फेस्टिवल में आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग और उसके संभावित दुष्परिणामों की जानकारी देने हेतु विशेष स्टाल लगाया गया, जहां दर्शकों ने तकनीक से जुड़े सकारात्मक व नकारात्मक पहलुओं को समझा।
सामाजिक सरोकार के तहत लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आयुष चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में इलाज के साथ-साथ निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया, जिससे बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने लाभ उठाया।

सम्मान समारोह
फिल्मों से जुड़े उत्कृष्ट कलाकारों, तकनीशियनों और सिने जगत में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को सिने गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं चिकित्सा, राजनीति, समाजसेवा और शिक्षा जैसे अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तित्वों को क्षत्रसाल गौरव सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया गया। नवोदित फिल्मकारों को भी सम्मानित किया गया यह पहल समाज के विविध क्षेत्रों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास रही।
स्टूडेंट्स के लिए मास्टर क्लास और वर्कशॉप
फेस्टिवल का एक महत्वपूर्ण पक्ष विद्यार्थियों और युवा फिल्मकारों के लिए आयोजित मास्टर क्लास और वर्कशॉप रहीं। इन सत्रों में अभिनय, निर्देशन, लेखन, सिनेमेटोग्राफी, एडिटिंग और फिल्म निर्माण की अन्य विधाओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से व्याख्यान दिए। छात्रों को सीधे अनुभवी फिल्मकारों से संवाद करने और सीखने का अवसर मिला, जो उनके भविष्य के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हुआ
कुल मिलाकर, खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल सिनेमा, संस्कृति और शिक्षा का एक समृद्ध संगम बनकर उभरा। इस आयोजन ने न केवल खजुराहो को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाई, बल्कि युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का सशक्त मंच भी प्रदान किया।

यह उल्लेख करना आवश्यक है कि खजुराहो जैसे पर्यटन स्थल के लिए ट्रेन और फ्लाइट की सुविधाएं सीमित हैं। ऐसे में यदि किसी दिन फ्लाइट कैंसिल हो जाए, तो उसी दिन खजुराहो पहुंच पाना कठिन हो जाता है। फेस्टिवल के दौरान कई आमंत्रित कलाकारों की इंडिगो की फ्लाइट कैंसिल हो गई, जिनमें नाना पाटेकर, भाग्यश्री, डॉक्टर चन्द्र प्रकाश द्विवेदी,प्रदीप रावत, राज बब्बर, हेमा मालिनी, शुभांगी अत्रे , और ऋतुपर्णा सेनगुप्ता आदि शामिल रहे।
नाना पाटेकर मुंबई से दिल्ली तो पहुंच गए, लेकिन दिल्ली से खजुराहो नहीं आ सके। भाग्यश्री वाराणसी तक पहुंचीं, पर खजुराहो नहीं आ पाईं। वहीं अनुपम खेर को एक दिन वाराणसी में रुकना पड़ा और अगले दिन ट्रेन से खजुराहो आना पड़ा, जहां कोहरे के कारण ट्रेन की लेटलतीफी का सामना करना पड़ा।
इन तमाम चुनौतियों के बावजूद आयोजकों की मेहनत, समन्वय और प्रतिबद्धता के चलते खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसे दर्शकों और सिनेप्रेमियों से भरपूर सराहना मिली।

सिने गौरव सम्मान इन्हें मिला
अनुपम जी खैर , पूनम ढिल्लो, सौरभ शुक्ला, दीपशिखा नागपाल, पंकज बैरी, निर्देशक एन चंद्रा, जयंत देशमुख इंदिरा तिवारी, वेद थापर निर्देशक सुधीर आजाद को भारती प्रधान, अवधेश महाराज एवं फ्रांस अभिनेत्री को मारियन बोर्गो सिनेमेटोग्राफर मलय राय सुबोध सिन्हा (साहित्यकार), गौरव शर्मा ,शीबाशीष सरकार, भूपिंदर सिद्धू, सुरिंदर अहलावत, डॉ. योगेश श्रीवास्तव और गौरव शर्मा फेदुद्दीन फरीदसर, मेहदीबकीर खान एवं सुरेश राम विदेशी कलाकारों में रोबर्ट मैक्सीन, अलफ्रेंडो केन्डेरा, मार्क एन्जल्स विनसेंट रोबिन,मिस्टर फर्नांडो मैगलानेस माटो सुश्री टिन्ना स्वेन्सडॉटिर सुश्री रेचल जोहान वाह्युनी इंडोनेसिया, मूथिया एसफंड इंडोनेसिया ,
छत्रसाल गौरव सम्मान इन्हें मिला
, विजय कुमार खत्री, बसंत चतुर्वेदी, अरुण कुमार उर्फ पप्पू अवस्थी,मीसाबंदी एवं स्वतंत्रता सेनानी मधुसूदन पितरे,वीरेंद्र कुमार रिछा रिया एवं राहुल अग्रहरी, एम एस राणा मध्यप्रदेश पर्यटन, जावेद मंसूरी, थाना प्रभारी प्रशांत कुमार सेन, प्रकाश चंसोरिया ,स्वप्निल कोठरी,विजय शंकर बबेले, राजेंद्र त्रिपाठी इंस्पेक्टर ममता कांबले
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