सौरभ घड़ी और महेश बिलहरा परिवार में लगाई चाबी
सागर। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज व आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से भाग्योदय तीर्थ सागर में बन रहे सर्वतोभद्र जिनालय के पहले खंड के गर्भगृह की चाबी 14 दिसंबर रविवार को सुबह 11 बजे मुनि श्री निष्कंप सागर महाराज, मुनि श्री निष्कामसागर महाराज के सानिध्य में हजारों लोगों की उपस्थिति में लगाई गई
मुकेश जैन ढाना ने बताया कि श्रीमती पुष्पा जैन, सौरभ घड़ी, अंशुल जैन, शशांक जैन और रमेश जैन, महेश बिलहरा, संतोष बिलहरा परिवार में संयुक्त रूप से भाग्योदय में बना रहे सर्बतोंभद्र जिनालय के प्रथम तल के गर्भगृह की चाबी विधि विधान और मंत्रोचार से प्रतिष्ठाचार्य अविनाश भैया भोपाल ने लगवाई। पहले चाबी की शुद्धि हुई और उसके बाद सभी पुण्यार्जको ने स्वास्तिक बनाकर के उसकी पूजा की फिर क्रेन के द्वारा लगभग 65 फीट ऊपर इस चाबी को स्थापित किया गया है

वर्ष 2030 तक मंदिर का कार्य पूर्ण होने की संभावना है। भारत में जैन धर्म के इतिहास सबसे बड़े जिनालय का निर्माण कार्य चल रहा हैं। मंदिर के निर्माण में 11 लाख घन फुट पत्थर का उपयोग होना है। अब तक 4.75 लाख घन फुट पत्थर का उपयोग हो चुका है 80 कारीगर पत्थर की फिटिंग के कार्य में लगे हुए हैं चार स्थानों पर पत्थर कार्विंग का निर्माण कार्य चल रहा है
कार्यक्रम में मुकेश जैन ढाना,देवेंद्र जैन स्टील, आनंद स्टील,प्रदीप जैन रांधेलिय,राजेश जैन रोड लाइंस, सुरेंद्र जैन मालथौन, दिनेश बिलहरा,ऋषभ बांदरी, सटटू कर्रापुर, राजेंद्र जैन केसली, प्रदीप जैन पड़ा, सौरभ जैन उपकार, सीए प्रियेश जैन, शैलेंद्र जैन शालू, मनोज जैन लालो, मिनी जैन सिंगापुर, राजा भैया जैन, विनोद बैसाखिया, अरविंद पथरिया, रितेश जैन, प्रकाश जैन पारस, सुदीप जैन सीए, तरुण जैन, सोनू जैन आईटीआई, राहुल इमलया शहर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे

आज के प्रवचन
सागर जैन समाज आचार्य भगवन के लिए समर्पित है मुनि श्री
मुनि श्री निष्कम्प सागर महाराज ने भाग्योदय तीर्थ में बन रहे सर्वतोभद्र जिनालय की चाबी स्थापित करने के कार्यक्रम में कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने पूरे देश में अलग-अलग प्रकल्प दिए हैं सागर को भाग्योदय तीर्थ अस्पताल के साथ-साथ सर्वतोभद्र जिनालय का कार्य करने का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है सागर जैन समाज का समर्पण तन मन धन से रहता है और आचार्य श्री के प्रकल्पों पर हमेशा जैन समाज समर्पित रही है
उन्होंने कहा कि आचार्य श्री की समाधि के बाद उनके शिष्यों की जवाबदारी बनती है कि आचार्य श्री के द्वारा प्रारंभ किए गए सभी प्रकल्पों को शीघ्र पूर्ण कराये जिससे लोगों को लाभ मिल सके आचार्य श्री के आशीर्वाद से हथकरघा, पत्थर के मंदिरों का निर्माण, अस्पताल, आयुर्वेदिक अस्पताल आदि प्रकल्प है जो देश के सैकड़ो स्थान पर चल रहे हैं
इस अवसर पर मुनि श्री निष्काम सागर महाराज ने कहा सागर ऐसा स्थान है जहां गुरुदेव की कृपा हमेशा बरसती रही है आप लोगों ने भी हर कार्य को गुरु आदेश मानकर पूर्ण करने का प्रयास किया है मंदिर निर्माण के बाद यहां पर दवा और दुआ एक साथ मिलेगी आज विश्व का पहला महान जिनालय सागर में बन रहा है और नए तीर्थ के निर्माण में सागर का नाम पूरे देश में अंकित होने जा रहा है।