रेलवे फाटक वर्षों पहले बंद आधा दर्जन से ज्यादा गांव के ग्रामीण और विद्यार्थी जान जोखिम में डाल करते हे रेल की पटरी पार
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम अंबाड़ी केमखेड़ी छपरई पुलिया के पास रेलवे क्रॉसिंग फाटक को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। आधा दर्जन से ज्यादा गांव के ग्रामीणों और विद्यार्थियों को रोज रेलवे पटरियां पार कर आना-जाना होता है।
सबसे ज्यादा विद्यार्थी रोज रेल की पटरिया पारकर हाई स्कूल सेमरा, माध्यमिक शाला अंबाडी और हाई सेकेंडरी स्कूल दीवानगंज पहुंचते हैं।
हजारों की संख्या में रोज छोटे-छोटे बच्चे जाते समय और आते समय रेल की पटरिया पर करना उनकी मजबूरी बन चुकी है। हालांकि रेलवे अंडर ब्रिज बनाया गया है लेकिन थोड़ा बहुत पानी गिरता है तो उसमें पानी भर जाता है जिससे पलिया में कीचड़ और दलदल का रूप ले लेती है। सबसे ज्यादा ग्रामीण अपने सीधा रास्ता चुनते जो रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरता है पुलिया में से निकलने पर ग्रामीणों को चक्कर खाना पड़ता है। इसलिए रेल की पटरिया के ऊपर से ही ज्यादातर ग्रामीण गुजरते हैं।

एक दिन पहले ही रेल की पटरी पार कर रहा है 16 वर्षीय जयेश की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। रेलवे ट्रैक पर 5-6 घंटे तक विद्यार्थी जयेश जयेश का शव पड़ा रहा, इससे पहले भी दीवानगंज रेलवे ट्रैक पर ट्रेन से गिरकर एक व्यक्ति की मौत हो गई थी उसे समय में भी शव तीन घंटा तक रेलवे ट्रैक पर पड़ा रहा था। जीआरपी पुलिस का क्षेत्र होने के कारण दुर्घटना में मृत व्यक्तियों के शव इसी तरह पड़े रहते हैं।
12 महीना में से 6 महीने तक पुलिया में पानी भरा रहने के कारण ग्रामीण पुलिया में से निकल नहीं पाते हैं। 6 महीने तक रेल की पटरिया पारकर अपने निजी कामों के लिए भोपाल ,विदिशा, दीवानगंज, अंबाडी गंज बासौदा अशोकनगर यदि के लिए जाते हैं। 6 महीना तक ग्रामीणों को रेल की तीन पटरिया के ऊपर से गुजरना पड़ता है। 6 साल पूर्व ही रेलवे विभाग ने रेलवे फाटक पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। जिसको खोलने के लिए कई सालों से आसपास गांव के ग्रामीण और किसान मांग करते हुए आ रहे हैं। लेकिन रेलवे विभाग किसानों और ग्रामीणों की मांग पर ध्यान नहीं दे रहा है। कई किसानों की जमीन रेलवे लाइन के उस पार पड़ती है। जब पुलिया में पानी भरा रहता है तब अंबाडी, सेमरा ,सहित कई गांवों के किसानों को आने-जाने और अपने वाहन को उस पार ले जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

केमखेड़ी, घोड़ाचौक, पिपरई, कालीटोर, शक्ति, मुनारा आदि गांव के ग्रामीण इसी रास्ते से होकर अपने जरूरी काम के लिए भोपाल, विदिशा, सांची, सलामतपुर, दीवानगंज आदि जगह जाते हैं। जिससे उनकी जान को हमेशा खतरा बना रहता था भोपाल से बीना तक चलने वाली ट्रेनें इसी मार्ग से होकर गुजरती है इस लाइन पर हर 15 मिनट मैं एक ट्रेन निकलती है ग्रामीणों को रेलवे पटरी पार करना जान जोखिम में डालना जैसा है अंबाड़ी छपरई रेलवे फाटक बंद होने से इन ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पढ़ रहा है।
12 महीना में से 6 महीना तक पुलिया में पानी भरा रहने के कारण
रोज 150 से लेकर 200 मोटरसाइकिल ग्रामीण रोज रेल की पटरियों के ऊपर से निकालते हैं। एक दिन पहले ही रेल की पत्तियों को पार कर रहा नाबालिक ट्रेन की चपेट में आ गया था जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
इनका कहना हे
हमारे यहां पांचवी तक स्कूल है पांचवी के बाद हमें हाई स्कूल सेमरा पढ़ने आना पड़ता है हमारी मजबूरी है क्योंकि हमें आगे पढ़ना है पुलिया में बारिश का पानी भरा होने के कारण हम लोग रोज रेल की पटरी पार कर पैदल चलकर आते जाते हैं।
रेणुका छात्रा
4 महीने पुलिया में पानी भरा रहता हैं। इसमें से ना तो कोई पैदल निकल सकता है ना ही कोई गाड़ी निकल सकती है इसलिए हमारे मम्मी पापा गाड़ी से छोड़ने नहीं आ पाते हैं। हम सभी छात्र-छात्राएं 7 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल आते जाते हैं। आने और जाने में तीन रेलवे पटरिया पार करना पड़ता है।
राधिका छात्रा