सुरेंद्र जैन धरसीवा
संसार के वास्तविक पालनहारा कौन हैं यदि हम अकेले किसान को कहें तो ये उस उपजाऊ भूमि के साथ उस उपजाऊ मिट्टी के साथ उस जल के साथ उन असंख्य सूक्ष्म जीवो के साथ उस गौ गोबर मूत्र के साथ नाइंसाफी होगी जिसके बिना एक अनाज के दाने से कई अनाज के दानो की पैदाबार होती है जो संसार की मानव जाति का पेट भरते हैं अर्थात पालनहारा हैं लेकिन सोचिए अगर उसी पालनहारा को जब आग के हवाले किया जाता है तो उन्हें कितनी तकलीफ होती होगी भले ही वह अपनी तकलीफ बोल नहीं सकते तो क्या हुआ क्या इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि किसी पर भी जब जुल्म होता है किसी को भी जब आग के हवाले किया जाता है तो वह किस तरह तड़पता होगा बाबजूद इसके निर्दयता पूर्वक उसी संसार के पालनहारा को अनाज उत्पादन फसल कटाई के बाद अब प्रतिदिन क्षेत्र में आग के हवाले किया जा रहा है और शासन प्रशासन मूक दर्शक बना हे..धरसीवा क्षेत्र में धान की फसल कट चुकी जिन खेतों की उपजाऊ मिट्टी ने संसार को जीवनदान दिया अब उन खेतों की मिट्टी में नरवाई ही शेष है जो मूक प्राणियों गौवंश आदि के चरने के काम आती ओर मिट्टी के अंदर असंख्य सूक्ष्म जीव जो मिट्टी को उर्वरा बनाने में मदद करते हैं वह सभी आग लगने से खेतों में भस्म हो रहे जल रहे.धरसीवा क्षेत्र के तरपोंगी सड्डू आदि क्षेत्र में खेतों में नरवाई में आग लगाई जा रही मंगलवार शाम को भी कई खेतों में आग लगाने से प्रदूषण भी फैलता दिखा.प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी खेतों में प्रतिदिन सांझ ढलते ही नरवाई में आग लगाने का क्रम जारी है जो न सिर्फ असंख्य सूक्ष्म जीवो को जला रहा बल्कि गौवंश का भोजन भी छीन रहा ओर माटी की उर्वरा शक्ति को भी कमजोर कर रहा साथ ही प्रदूषण भी फैला रहा