रामभरोस विश्वकर्मा, मंडीदीप रायसेन
शासकीय (सरकारी) लोन दिलाने के नाम पर दलालों द्वारा बड़े पैमाने पर ठगी और फर्जीवाड़े के होने के आरोप सामने आए हैं। शिकायतों में कहा गया है! कि यह गिरोह बैंक के अंदर तक सेटिंग कराकर, जीएसटी फर्मों के नाम पर फर्जीवाड़ा करवा कर और कोटेशन—खरीदारी के कागजी खेल से कारोबारी दस्तावेज़ गढ़वाते हुए काम कर रहा है।
मुख्य आरोप और तरीका-कार्रवाइयां
शिकायतकर्ताओं का कहना है! कि कई मामलों में बैंक के शाखा मैनेजर और संबंधित अधिकारियों तक की मिलीभगत है! — वे दलालों के बताए हुए दस्तावेजों के आधार पर लोन प्रोसेसिंग में सहूलियत देते हैं।
दलाल गुमनाम या नकली जीएसटी रजिस्ट्रेशन के नाम पर फर्में बनवा कर बड़े-बड़े लोन और सब्सिडी-आधारित लाभ दिलवाने का दावा करते हैं; बाद में उन फर्मों के पते और रिकॉर्ड फर्जी साबित हो जाते हैं।
कोटेशन और खरीद-फरोख्त के कागजात (प्रोफॉर्मा इनवॉइस, सप्लायर कोटेशन इत्यादि) दलालों के नियंत्रण में तैयार कराए जाते हैं—जिससे ऑडिट और सत्यापन में भी गड़बड़ी होती है।
दलाल हर स्तर पर—कागजी खरीदारी, इनवॉइस, बैंक पासबुक/एटीएम तक—कई तरह की सेटिंग करते हैं ताकि लोन और धन ट्रांज़ेक्शन का रास्ता आसान रहे।
पीड़ितों की बात एक पीड़ित ने बताया, “हमें बताया गया कि सरकारी लोन मिल जाने पर हमे फायदा होगा; कुछ हजार देकर हमने दस्तावेज करवाए, बाद में पता चला कि खाते व कागजात का उपयोग गलत तरीके से किया जा रहा है।” अन्य कई लोगों ने भी कहा कि दलाल सीमांत और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के साथ ऐसा करते हैं — खाते खुलवाकर और फिर उन खातों में धन ट्रांसफर करवा कर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।
कानूनी और बैंकिंग खतरों पर विशेषज्ञों का सुझाव कानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि इस प्रकार की गतिविधियाँ बैंकिंग धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, और मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आती हैं। ऐसा होने पर संबंधित शाखाओं के खिलाफ बैंकिंग मॉनिटरिंग, विस्तृत आडिट और आवश्यकता अनुसार फोरेंसिक जांच की मांग की जानी चाहिए।
बैंकों को भी चाहिए कि वे KYC (Know Your Customer) वेज़र्बल सेक्योरिटी—खासकर जिन खातों पर असामान्य ट्रांज़ैक्शन हों—उनकी नियमित समीक्षा और संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्टिंग फौरन करें।
क्या जांच होनी चाहिए (प्रस्तावित कदम)
1. बैंकिंग से जुड़े अधिकारियों और शाखा मैनेजरों के स्रोत-लेनदेन का आडिट।
2. फर्जी जीएसटी/फर्म रजिस्ट्रेशन वाले मामलों में GST पोर्टल और NIC/आधार लिंक्ड वेरिफिकेशन।
3. पीड़ितों से कथित दलालों के नाम, मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट डिटेल्स एकत्र कर पुलिस/ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) में शिकायत दर्ज कराना।
4. बैंकिंग इन्स्पेक्शन और आवश्यक हो तो पक्षकारों के खिलाफ एफआईआर और संपत्ति कुर्की।
5. आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए लोकल प्रशासन और बैंक शाखाओं द्वारा संयुक्त सतर्कता संदेश प्रकाशित किए जाएँ।
प्रशासन से उम्मीद स्थानीय प्रशासन और बैंकिंग प्राधिकरण से अनुरोध है कि वे इस मामले की निष्पक्ष और तेज़ अनुसंधान कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें ताकि आंशिक या गरीब नागरिकों का शोषण बंद हो सके और सार्वजनिक धन की सुरक्षा सुनिश्चित हो।