मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
भोपाल विदिशा हाईवे 18 पर स्थित बालमपुर घाटी पर हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। हर साल बारिश के समय में सबसे ज्यादा हादसे बालमपुर घाटी के आसपास ही होते हैं।बार-बार हादसे होने के कारण बालमपुर घाटी को अब ग्रामीण हादसों की घाटी कहने लगे हे।
देर रात बालमपुर घाटी उतरते ही ट्राला क्रमांक यूपी 77 एएन 6713 अनियंत्रित होते हुए 5 फीट गहरी खाई में जाते हुए धंस कर वहीं पर रह गया। वह तो गनीमत रही के ट्राला ने पलटी नहीं खाई नहीं तो आज फिर एक बड़ा हादसा बालमपुर घाटी पर हो जाता।

ट्राला ड्राइवर राजेंद्र सिंह निवासी ललितपुर ने बताया की ट्राला में पाउडर ओर टाइल्स भरकर टीकमगढ़ जा रहे थे। जैसे ही रात 9:30 बजे बालमपुर घाटी उतने ही थे कि रोड पर पशुओं का झुंड बैठा हुआ था उसी समय एक कार पशुओं को बचाने के चक्कर में ट्राले के सामने आ गई। कार बचाने के चक्कर में मैने ट्राला को रोड से नीचे उतरा तो ट्राला अनियंत्रित होते हुए गहरी खाई में जाकर धंस गया। वहां तो ईश्वर की कृपा रही कि ट्राला और आगे नहीं गया नहीं तो पलटी खा सकता था जिससे हम दोनों को साथ कुछ भी हो सकता था। हालांकि हम दोनों को किसी प्रकार की कोई चोट नहीं आई है।
बता दे की बालमपुर घाटी पर अक्सर बारिश के समय में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं होती है जिनमें ज्यादा मात्रा ट्रैकों की होती है क्योंकि घाटी की ऊंचाई अत्यधिक होने के कारण ज्यादातर ट्रैकों के ब्रेक फेल होने के कारण अक्सर ट्रक खाई में पलटते रहते हैं इससे पहले भी कई ट्रक खाइयो में पलट चुके हैं। बार-बार हादसों के कारण खाई की तरफ लगी लोहे कि रेलिंग कई जगह से टूट चुकी है।