महिला में बाल विकास विभाग पर्यवेक्षक ने 1 लाख 80 हजार मांगे, डेढ़ लाख में सौदा हुआ, 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ी गई
– महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक को लोकायुक्त ने रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया
– आंगनवाड़ी सहायिका के पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर मांगी थी रिश्वत
रंजीत गुप्ता शिवपुरी
शिवपुरी जिले के नरवर में महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक अनीता श्रीवास्तव को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पर्यवेक्षक अनीता श्रीवास्तव ने एक युवती से आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर नौकरी देने के नाम पर 1 लाख 80 हजार रुपए की मांग की थी। इसके बाद डेढ़ लाख रुपए में सौदा तय हुआ था। जिसकी रिकॉर्डिंग शिकायतकर्ता द्वारा लोकायुक्त में पेश की गई थी। इसके बाद लोकायुक्त ने छापा मार कर रिश्वत की डील के समय 20 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए अनीता श्रीवास्तव को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया।
डेढ़ लाख रुपए में सौदा तय हुआ था-
लोकायुक्त को शिकायत में जिले के अटा बीरपुर निवासी शिशुपाल जाटव ने बताया कि उनकी बहन ने अपने गांव में खाली पड़े आंगनवाड़ी सहायिका पद के लिए आवेदन किया था। कुछ दिन बाद पर्यवेक्षक अनीता ने फोन कर बताया कि उसका नाम चयन सूची में दूसरे नंबर पर है। उसने कहा कि पैसा देने पर नौकरी पक्की हो जाएगी। इसके बाद शिशुपाल अनीता से व्यक्तिगत रूप से मिला। पर्यवेक्षक ने 1.80 लाख रुपए की रिश्वत मांगी। बातचीत के बाद सौदा डेढ़ लाख रुपए में तय हुआ।
20 हजार रुपए की रिश्वत देते हुए पकड़ा-
इस पूरे मामले की शिकायत शिशुपाल जाटव ने लोकायुक्त में की। इसकी रिकॉडिंग भी पेश की। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने मंगलवार को कार्रवाई की। पूर्व से तय डील के अनुसार जैसे ही शिशुपाल ने पर्यवेक्षक को 20 हजार रुपए दिए, टीम ने अनीता को रंगे हाथों पकड़ लिया। रिश्वत की रकम उसके हाथ से बरामद की गई।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज-
लोकायुक्त टीम ने अनीता के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। टीम अब पूछताछ कर रही है कि वह यह रकम किसके लिए ले रही थी और इसमें और कौन-कौन शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता का कहना है कि चयन सूची में दस्तावेजों में गड़बड़ी दिखाकर लोगों को हटाने की कोशिश की जाती है। आंगनवाड़ी भर्ती प्रक्रिया में खुलेआम भ्रष्टाचार हो रहा है। इसकी जांच की जाना चाहिए।