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कान पकड़कर पति ने मांगी माफी, पत्नी भी हुई घर जोड़ने को तैयार

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– परिवार परामर्श केंद्र में 3 टूटे परिवार फिर हुए एक, 17 प्रकरण में हुई सुनवाई

शिवलाल यादव

रायसेन। पति की मारपीट और सास ससुर की प्रताड़ना से परेशान पत्नी चार बच्चों के साथ मायके में रह रही थी। मामला परिवार परामर्श केंद्र में आने के बाद पति ने न केवल अपनी गलती स्वीकार की बल्कि कान पकड़कर मांफी मांगी साथ ही आगे से ऐसा न करने का वचन दिया। उसके बाद पत्नी भी सारे गिले-शिकवे भुलाकर पति के साथ रहने को राजी हो गई।

परिवार परामर्श केंद्र में आए प्रकरण में पत्नी अपने ससुराल वालों व पति की प्रताड़ना से तंग आकर चार बच्चों के साथ मायके में रह रही थी। पत्नी ने बताया कि पति मारपीट करता है और सास-ससुर भी परेशान करते हैं। समझाइश के बाद पति ने अपनी गलती मानी और पत्नी व पूरी समिति के सामने कान पकड़कर माफी मांगी, साथ ही कहा कि अब वह आगे से ऐसी कोई गलती नही करेगा। अपनी पत्नी और बच्चों के साथ कमरा लेकर रहेगा। पति के अस्वाशन पंर पत्नी भी उसके साथ जाने को तैयार हो गई। दूसरे प्रकरण में पत्नी ने गुहार लगाई थी कि पति उसे लिवाने नही आ रहा। पति ने बताया कि पत्नी उन्हें पुलिस की धमकी देती है इसलिए डर के कारण वह नहीं ले जा रहे थे, दोनों पक्षों को समझाया तो वह फिर से साथ रहने को तैयार हो गए।
परामर्श केंद्र की बैठक में एसडीओपी अदिति भावसार, अध्यक्ष कैलाश श्रीवास्तव, सलाहकार अशोक गुप्ता, चेतन राय, अनीता राजपूत, एएसआई अनिल वर्मा, आरक्षक लोकेंद्र मोर्य उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि एसपी विकास शहवाल के मार्गदर्शन में हर मंगलवार को एसडीओपी कार्यालय में परिवार परामर्श केंद्र की बैठक आयोजित की जाती है, जिसके माध्यम से परिवारिक विवादों को आपसी सहमति के सुलझाने का प्रयास किया जाता है।


घर तोड़ने से पहले दिया 7 दिन का समय
परिवार परामर्श केंद्र में दो प्रकरण ऐसे भी आए, जिनमे पत्नियां पहली बार मे ससुराल जाने से साफ मना कर रहीं थी। दोनों मामलों में काउंसलिंग के बाद कुछ हद तक उनका मन ससुराल जाने के लिए बना, लेकिन 100 फीसदी निर्णय की स्थिति में नहीं थी। ऐसे में उन दोनों मामलों में पक्षकरों को 7 दिन का समय और दिया गया, ताकि घर टूटने से बचाया जा सके।
तीन प्रकरण में राजीनामा, 17 की हुई सुनवाई
मंगलवार को परिवार परामर्श केंद्र में सुनवाई के लिए 17 प्रकरण रखे गए थे, जिसमे में 3 परिवारों में आपसी सहमति से राजीनामा हुआ। दो प्रकरण समयसीमा पूरी होने पर नस्तीबद्ध किए गए। 12 प्रकरणों को सुनवाई के लिए अगली तारीख दी गई है।

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