दिन में तेज धूप होने के कारण रवी फसलों पर पड़ रहा विपरीत असर,गेहूं में तीन से पांच पानी देना पड़ रहा है किसानों को
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
दीवान गंज सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों में मुख्य रूप से गेहूं की खेती होती है। हालांकि प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्र में अलग-अलग किस्म का गेहूं पैदा होता है। कई बार यह मिट्टी की प्रकृति के साथ-साथ सिंचाई की गुणवत्ता पर भी निर्भर करता है। ऐसे में गेहूं की फसल को और अच्छा बनाने के लिए किसान समय-समय पर अपने खेत में पानी फेरता ताकि फसल अच्छी हो और पैदावार ज्यादा निकले।
क्षेत्र के कई किसानों का कहना है कि फरवरी के महीने में ज्यादा धूप पढ़ने के कारण जहां पर तीन पानी गेहूं में लगाते हैं वहां पर पांच पानी लगाना पड़ रहा है ताकि फसल की पैदावार अच्छी हो सके।
गेहूं सिंचित हो या असिंचित, हमारे क्षेत्र में ज्यादातर किसान पलेवा करके गेहूं की बुवाई करते हैं। मतलब पहले खेत की सिंचाई कर लेते हैं और फिर उसकी बुवाई करते हैं, जिससे नमी बनी रहती है। और बीज में अंकुरण हो जाता है लेकिन अगर सूखे में बुवाई करते हैं, और फिर बाद में पानी देते हैं, सूखे बुवाई करते हैं तो उसके तुरंत बाद पानी देना जरूरी होता है जिससे बीजों का अंकुरण सही तरीके से और सही समय पर हो जाए। किसान अपने खेतों में अंकुरण के लिए तो पानी देते ही हैं लेकिन उसके बाद बीज बोने से 21 से 25 दिन की अवस्था में जब फसल आती है, तो पहला पानी देना बहुत जरूरी होता है। किसान पलेवा करके बुवाई करते हैं या फिर सूखे में बुवाई करते हों, अंकुरण के लिए दोनों ही अवस्था में पानी देना जरूरी होता है, क्योंकि शीर्ष जड़ निकलने का समय होता है।
किसान के पास अगर पूरे सीजन में दो ही पानी की उपलब्धता है तो पहला 25 दिन की अवस्था में और दूसरा पानी बालियां निकलते समय 80 से 50 दिन की अवस्था में देना जरूरी होता है। अगर किसान के पास तीन पानी की उपलब्धता है तो पहला पानी 21 से 25 दिन की अवस्था में जड़ निकालने की अवस्था में देना पड़ता है।