मुख्यमंत्री,मंत्री एवं शीर्ष अधिकारियों पर टिकी अतिथि विद्वानों की निगाहें
भोपाल।सूबे के सरकारी कॉलेजों में इस समय अफरा तफ़री का माहौल बराबर बना हुआ है।सरकार एवं विभाग की पूरी नज़र पीएमश्री एवं एक्ससिलेंस कॉलेजों की व्यवस्था को सुदृढ बनाने में है लेकिन व्यवस्था बनाने में पसीने छूट रहे हैं।अभी हाल ही में लगभग 600 प्राध्यापको का डिप्लॉयमेंट हुआ लेकिन वो भी विवादित हुई और विभाग को संशोधित पत्र जारी करना पड़ा कि उनकी ज्वाईनिंग में ही संदेह हो गया तो कई जगह हुई ही नही।वहीं रिक्त पदों के विरुद्ध सेवा करने वाले अतिथि विद्वानों के पास भी समस्याओं की लंबी फेहरिस्त है।पूरे प्रदेश में अतिथि विद्वानों की संख्या लगभग 4500 के करीब है इनके पास योग्यता भी है अनुभव भी है अब देखना है कि मुख्यमंत्री एवं विभगीय मंत्री की नज़र कब तक मे इन विद्वानों के तरफ पड़ती है जिससे इनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
*अतिथि विद्वानों के स्थाई होने से हो सकता है समश्या का समाधान*
हरियाणा की भाजपा सरकार ने रिक्त पदों के विरुद्ध काम करने वाले उन अतिथि विद्वानों को उन्ही पदों में स्थाई/समायोजित कर दिया है जिनको पांच वर्ष का अनुभव था इस ऐतिहासिक निर्णय ने पूरे देश मे वाहवाही बटोरी है।
वहीं अतिथि विद्वान महासंघ के मीडिया प्रभारी डॉ आशीष पांडेय ने बयान जारी करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश का शासन प्रशासन हरियाणा के साशन प्रशासन जैसे दृढ़ इक्षा शक्ति दिखाते हुए संवेदनशीलता के साथ अतिथि विद्वानों का भविष्य सुरक्षित करे।पिछले 24-25 वर्षों से विद्वान अपने भविष्य सुरक्षा के लिए संघर्षरत है।डॉ पांडेय ने बताया कि कॉलेजों का हर काम अतिथि विद्वान ही करते हैं अनुभवी है योग्य है फ़िर भी स्थाई नहीं इस तरफ़ प्रदेश सरकार को जरुर ध्यान देना चाहिए गंभीरता से।शहरी एवं दूर दराज के महाविद्यालयों को बहुत ज्यादा फ़ायदा होगा अतिथि विद्वानों के स्थाई होने पर।
इनका कहना हे –
रिक्त पदों के विरुद्ध सेवा करने वाले अतिथि विद्वानों को उन्हीं पदों में स्थाई/समायोजित करना चाहिए जिनमे वो काम कर रहे हैं।एक कैडर बनाकर भविष्य सुरक्षित करना चाहिए।माननीय मुख्यमंत्री,उच्च शिक्षा मंत्री एवं विभगीय शीर्ष अधिकारियों से अनुरोध है कि इस मामले में ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए कल्याण करें विद्वानों का।
डॉ देवराज सिंह,प्रदेश अध्यक्ष महासंघ