खाद की जितनी जरूरत उससे आधा भी नही मिल रहा,डीएपी की जगह एनपीके,किसान बोले एनपीके के रिजल्ट ठीक नही,उत्पादन पर पड़ेगा असर
– साल 700 टन यूरिया और 600 टन डीएपी लगता है मगर इस साल अभी तक 400 टन यूरिया और 300 टन डीएपी खाद्य ही उपलब्ध
– किसान बाहर से खाद लेने को हो रहे हैं मजबूर
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
जिले में किसान काफी ज्यादा दुखी और हताश हैं। उनकी समस्या सुनने या देखने वाला कोई भी नहीं है। जिले में कई किसान लाइन लगाकर खाद पाने के लिए तरस रहे हैं, तो वहीं प्रशासन द्वारा व्यवस्थाएं सुधारने की बात कही जा रही है जो जमीनी स्तर पर बिल्कुल भी सच होती नहीं दिखाई दे रही है।
दीवानगंज सोसाइटी में इन दिनों किसान खाद के लिए बार-बार चक्कर काटते हुए दिखाई दे रहे हैं। बड़ी संख्या में किसान खाद के लिए सुबह 6 बजे से ही आकर खड़े जाते हैं। बावजूद इसके उन्हें समय से खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है ।जिसके कारण किसानों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है किसान खाद के लिए इधर उधर भटक रहे हैं। फिर भी खाद नहीं मिल पाता है।
किसान धरती का भगवान कहे जाने वाले दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं। कारण है कि उन्हें अपनी गेंहू की फसल को बोने के लिए जिस डीएपी खाद की जरूरत होती है, वह समय पर नहीं मिल पा रही है। किसान को भगवान इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह अनाज उगाता है, जिससे सभी का पेट भरता है। लेकिन दीवानगंज क्षेत्र के हालात किसानों के लिए बेहद खराब हैं। आलम यह है कि किसान डीएपी खाद के लिए सुबह 6 बजे से आकर सोसाइटी के सामने खड़े हो जाते हैं। जैसे ही सोसाइटी खुलता है तो किसान खाद के लिए परेशान होते रहते हैं।
जरूरत 30 बोरी की, मिल रही 5 बोरी खाद
कई घंटे की मेहनत और मशक्कत के बाद 4 से 5 बोरी खाद मिल रही है, जिससे किसानों को बोवनी करने में खासी परेशानी हो रही है। मदन सिंह अंबाडी, अमर सिंह केम खेड़ी, पर्वत सिंह जमुनिया, गजराज सिंह सेमरा, अमोल सिंह पिपलिया, तेज सिंह, गणेश राम नरखेडा आदि किसानों की पीड़ा है कि सुबह 6 बजे से तेज ठंड में खाद वितरण केंद्र में आकर लाइन में लगते हैं और उसके बाद सिर्फ चार पांच बोरी खाद की मिलती है। अगर खाद खत्म हो जाए तो और कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है। जिससे किसान गेहूं की बोवनी समय नहीं कर पा रहे हैं।
डीएपी खाद के लिए दीवानगंज पहुंचे किसानों ने बताया कि, हफ्ते भर की मेहनत के बाद बड़ी मुश्किल से खाद मिलती है। सवाल यह है कि जिस किसान को 30 बोरी डीएपी की जरूरत है, उस किसान को पांच बोरी डीएपी खाद मिलेगी तो वह कैसे अपनी फसल बो पाएगा। कई किसानों को लाइन में शाम तक लगने के बाद भी खाद नहीं मिलता इसके चलते उन्हें निराश होकर अपने घर वापस लौटना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार दीवानगंज सोसाइटी में हर साल 700 टन यूरिया और 600 टन डीएपी लगता है लेकिन इस साल अभी तक 400 टन यूरिया और 300 टन ही डीएपी उपलब्ध हो पाया है। जिससे सभी किसानों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं हो सका है।
दीवानगंज क्षेत्र के किसान प्राइवेट दुकानों पर 1700 से लेकर 1900 रुपयों तक में डीएपी खाद की बोरी खरीदने को मजबूर हैं। वही यूरिया के लिए 267 की जगह 330 रुपए तक किसानों ने दिए हैं। ताकि समय पर बोनी हो सके। अगर किसान इन खादो का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो फसलों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है।
अधिकारी समितियों पर खाद उपलब्ध न होने पर चुप्पी साधे हुए हैं और किसान बाजार में भटक रहे हैं। जानकारी के अनुसार डीएपी जिले से ही उपलब्ध नहीं हो पा रहा है विभाग द्वारा एनपीके 20,20,13 खाद भेजी गई थी मगर किसान इसको लेने से मना कर रहे हैं। खाद न मिलने से किसानों की बुवाई में देरी हो रही है। दीवानगंज सोसाइटी में अभी तक 400 टन यूरिया और 300 टन डीएपी किसानों को बाटा गया है। इससे किसानों को कोई राहत नहीं मिली है क्षेत्र बड़ा होने के कारण किसानों की यूरिया और डीएपी की मांग ज़्यादा है।
इनका कहना हे –
खाद जिले से ही नहीं आ पा रहा था जिस कारण किसानों को उपलब्ध नहीं हो रहा था। मगर चार दिन से लगातार खाद से भरे हुए ट्रक आए हैं किसानों को लगातार खाद बांटा जा रहा है किसान एनपीके खाद नहीं ले रहे है। किसानों को डीएपी, और यूरिया ही चाहिए। कुछ दिनों में सभी किसानों को खाद उपलब्ध हो जाएगा।
देवेंद्र मीणा प्रबंधन सोसायटी