मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
गणेश,दुर्गा जी तजिए सहित छोटी-बड़ी करीब 30 प्रतिमाएं दीवानगंज तलाब में विसर्जित की गई हैं। जिसमें फूल माला सहित अन्य सामान विसर्जित किए गए हैं। दीवानगंज तालाब सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों के अन्य तालाबों की सफाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दीवानगंज सहित आसपास के गांव के तालाबों में गंदगी का अंबार है, तो कहीं घाट ही पूरी तरह से खत्म हो गए है। समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो छठ के दौरान परेशानी हो सकती है।
दीवानगंज के आसपास के ग्रामीण अंचलों में तालाबों की बहुलता रही है जिससे यहाँ का भूजल स्तर भी काफी अच्छा रहा है लेकिन पिछले कुछ दशकों में तालाबों की संख्या में न केवल आश्चर्यजनक रूप से कमी आयी है बल्कि वे कम गहरे तथा प्रदूषित भी होते जा रहे हैं। पानी के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। यहाँ तक हमारे शरीर में भी करीब अस्सी प्रतिशत पानी है। हम प्रदूषित जल का सेवन करने में, उपयोग करने में हिचकते हैं तो हमारे सरोवर जिनका प्राणाधार ही जल है, उसमें रहने वाले वनस्पति, जलचर उस आधार के प्रदूषण से उसमें किस प्रकार तिल-तिल कर मरते होंगे। इसकी कल्पना बड़ी आसानी से की जा सकती है।

विकास तथा शहरीकरण के दौर में अनेक बड़े-बड़े तालाब पाटकर कॉम्पलेक्स बनाने, तालाब की भूमि पर अतिक्रमण करने के कारण काफी तालाब शहादत को प्राप्त हो चुके हैं, वहीं कुछ सामाजिक परम्पराओं के गलत उपयोग के कारण भी तालाब प्रदूषित तथा पटते जा रहे है। कुछ तालाब में जलकुंभी फैलने, अतिक्रमण, आसपास की फैक्ट्रियों के खतरनाक रसायनों के प्रवाहित करने से बीमार हो रहे है।
लेकिन तालाबों में साफ-सफाई रहना व प्रदूषण मुक्त रखने के लिए समाज के सभी वर्गों का एकजुट होना सार्थक ढंग से प्रयास करने से ही संभव है। तालाबों में प्रदूषण का एक महत्त्वपूर्ण कारण उसमें डाले जाने वाली विभिन्न सामग्री है, जो विभिन्न अवसरों पर डाली जाती है। इसमें धार्मिक अवसरों, शोभा यात्राओं में प्रवाहित किए जाने वाले पदार्थों की संख्या भी कम नहीं है। हम सब धार्मिक नागरिक कहलाना पसंद करते हैं। जिसके कारण विभिन्न धर्मों में पूजा व उपासना की अलग-अलग मान्यताएँ विकसित होती चली गई है। सभी धर्मावलंबियों में आस्था के प्रदर्शन की सार्वजनिक एंव व्यक्तिगत रुचि बढ़ती जा रही है। विभिन्न अवसरों में न केवल मूर्तियाँ बनती हैं ;बल्कि ताज़िये भी बनते हैं। जब ये बनते हैं, तो निश्चित अवधि के बाद विसर्जित भी होते हैं। यह सभी गांव से लगे तालाबों में विसर्जित किए जाते हैं मगर तालाब को बाद में साफ नहीं किया जा