श्रद्धा, सत्संग और प्रभु प्रेम से ही श्री रामचरितमानस ग्रंथ को समझा जा सकता है- नर्मदा प्रसाद रामायणी
उदयपुरा रायसेन।नर्मदा अंचल में श्री रामचरितमानस विद्यापीठ द्वारा संचालित मानस यात्रा, अंतर्गत सत्संग, सेवा, सुमरन, कार्यक्रम, नगर के शिवहनुमान मंदिर तहसील कार्यालय के पास हुआ, कार्यक्रम के आयोजक शिवदयाल धाकड़ ने मानस ग्रंथ का पूजन एवं उपस्थित विद्वानों का तिलक, चंदन लगाकर सम्मान किया।

सत्संग सभा में नर्मदा प्रसाद रामायणी ने मानस का रूप और माहात्म्य के प्रसंग पर बताया कि संत तुलसीदास जी ने अपने ग्रंथ में बताया है कि, जिनके पास श्रद्धा नहीं है, एवं जिन्होंने संतों का संग नहीं किया है, जो प्रभु श्री राम जी के प्रेमी नहीं है, उनके लिए श्री रामचरितमानस ग्रंथ अत्यंत कठिन है, अर्थात श्रद्धा, सत्संग, और प्रभु प्रेम से ही हम मानस ग्रंथ को समझ सकते हैं, सुन सकते हैं, और उसे पर चलकर हम अपना और अपनों का आत्म कल्याण कर सकते हैं, मानस प्रचारक छोटे महाराज ने कहां की मानस ग्रंथ आध्यात्मिक, आधिदेविक, आधिभौतिक तापों से हम सबको बचाता है, सत्संग सभा में आशीष शास्त्री, अर्जुन भार्गव, हरिदास शास्त्री, योगेश पांडे, देवव्रत राजोरिया, रघुवीर शर्मा, ने याज्ञवल्क्य -भरद्वाज संवाद तथा प्रयाग माहात्म्य के प्रसंग पर सुंदर व्याख्या प्रस्तुत की, यात्रा संयोजक चतुरनारायण अधिवक्ता ने मंदिर प्रबंधन समिति अध्यक्ष आर जी वर्मा के अनुरोध पर नवदुर्गा उत्सव तक के सभी कार्यक्रम नगर के शिव हनुमान मंदिर पर किए जाने की घोषणा की, ग्रंथ की मंगल आरती में जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि राम सिंह चंदेल, पेंशनर संघ के पदाधिकारी पी एन सिसोदिया, गया प्रसाद वर्मा, निर्भय मेहरा, बलदेव सिंह रघुवंशी, जुगल किशोर टेकाम, राजेंद्र गुप्ता, राजकुमार कौरव, आशीष शर्मा, ओमकार रघु, नर्मदा प्रसाद, डीपी पाठक, वीरेंद्र पटेल, सीताराम धाकड़, कमलेश पटेल, महेश बड़कुर सहित मानस प्रेमी जनों ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया,