देवेंद्र तिवारी सांची रायसेन
बिजली गायब होने की कल ई तब खुल जाती है जब सर्दी गर्मी बारिश मे साल भर लगातार बिजली का मेंटेनेंस काम चलता रहता है तब बारिश शुरू होते ही बिजली घंटों के लिए नदारत हो जाती है तब बिजली मेंटेनेंस कार्य समझ से परे हो जाता है बावजूद इसके भारीभरकम बिजली बिल का खामियाजा उपभोक्ता भरने पर मजबूर रहते हैं।
जानकारी के अनुसार बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाये रखने के लिए सालभर विद्धुत वितरण कंपनी के जिम्मेदार मेंटेनेंस कार्य करने के नाम पर चाहे कोई भी मौसम हो बिजली कटौती करते दिखाई देते हैं तथा तब उपभोक्ताओं को यह कहकर संतुष्ट कर दिया जाता है कि मेंटेनेंस कार्य चल रहा है जिससे बिजली व्यवस्था सुचारू रखी जा सके परन्तु ऐसा होता नहीं है जितना अधिक मेंटेनेंस कार्य चलता है उतनी ही बिजली व्यवस्था चरमराई दिखाई देती है सर्दी के मौसम मे बिजली की अधिक खपत होने से बिजली लाइन लोड उठाने मे सक्षम नही रहती तथा बिजली व्यवस्था चौपट हो जाती है जब गर्मी का मौसम शुरू होता है तब भी बिजली की अधिक खपत तथा लाइन एवं मंडल द्वारा डाली गई केवल गर्मी के कारण धूंधू कर जल उठती हैं जिससे घंटों बिजली व्यवस्था चौपट रहती है तथा लोगों को बिजली न होने का खामियाजा तो भुगतना ही पडता है बल्कि गर्मी मे लोगों को बिजली न होने से पेयजल के गंभीर संकट से गुजरना पडता है तथा लोगों को खासी परेशानी उठानी पडती है यही हाल बारिश का भी बना रहता है भर गर्मी मे तब बिजली गडबडा जाती है जब लोगों को बिजली की जरूरत पडती है परन्तु तब मंडल के कर्ताधर्ता यह कहकर पल्ला झाड लेते हैं कि बारिश पूर्व तैयारी के कारण बारिश मे बिजली व्यवस्था सुचारु बनी रह सके चल रही हैं तब लोगों को मंडल अधिकारियों पर भरोसा करना पडता है कि बारिश मे बिजली सुचारू बनेगी ।परन्तु यह सब मंडल का आश्वासन धरा रह जाता है जब बारिश शुरू होते एवं थोडी बहुत हवा पानी के चलते बिजली व्यवस्था घंटों के लिये चौपट हो जाती हैं तथा बिजली की बारिश पूर्व तैयारी धराशायी होकर लोगों को अंधेरे मे रहने मजबूर कर देते हैं जिससे पानी गिरते ही जहरीले कीडे कांटों के बिलो मे पानी घुसते ही कीडेकांटे बाहर आ जाने से लोगों को जान का खतरा बढ जाता है वैसे तो नगर सहित क्षेत्र मे बिजली सुचारू बनाने के लिए केवल को पुरानी बता कर व्यवस्था जुटाने की असफलता को छिपा दिया जाता हैं परंतु यह कल ई भी तब खुल जाती है जब पुरानी केवल हटाकर न ई केवल डालने के उपरांत भी केवल का जलना बरकरार बना रहता है तब आखिर बिजली व्यवस्था सुचारु बनाने मे कौन सी केवल मंडल डालकर लोगों को सुविधा उपलब्ध करा पायेगा कहना मुश्किल दिखाई देता है तब लोगों की जबान पर यह चर्चा जरूर चलने लगती है कि कहीं न कहीं कंपनी एवं उसके अधिकारी मेंटेनेंस के नाम पर कंपनी को चूना लगाते रहते हैं तथा लोगों को व्यवस्था जुटाने के नाम पर भारी भरकम बिजली खपत की राशि के रूप मैं उपभोक्ताओं के ऊपर भार डाल दिया जाता है जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पडता हैं ।इस गंभीर समस्या की ओर न तो प्रशासन न ही शासन का ध्यान ही पहुंच पाता है जिससे लोगों का भरोसा शासन प्रशासन से उठता दिखाई देता हैं ।