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जिले का एकमात्र स्थान जहां सती स्तंभ है मंदिर में ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के रूप में है पहचान

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रिपोर्ट धीरज जॉनसन,दमोह

पुरातात्विक महत्व के स्थलों से भरपूर इस जिले में वैसे तो अनेक प्रकार की प्राचीन कलाकृतियां,मठ,मंदिर, भग्नावशेष,किले, बावड़ियां दिखाई देते है जिनमें से कुछ संरक्षित है और कुछ संरक्षण के इंतजार में प्रतीत होते है,परंतु विभिन्न हिस्सों में ऐसे प्रस्तर खंड भी मौजूद है जिनमें मानव आकृति के साथ अन्य चिन्ह और कुछ लेख अंकित रहता है कहीं कहीं इसके इर्द गिर्द चबूतरा है इन्हें स्थानीय स्तर पर बड़ी माता,छोटी माता, खैर माता, सती के चीरे,शक्ति माता भी कहा जाता है परंतु कहीं कहीं इन पर ध्यान नहीं गया है।

हिंडोरिया का सती स्तंभ जिले और संभवतः प्रदेश का एकमात्र स्थान हो सकता है जो मंदिर में है क्योंकि अन्य स्थानों पर इस तरह के स्तंभ के चारों तरफ चबूतरे दिखाई दिए और जो सुनसान स्थान पर है उन पर ध्यान नहीं दिया गया,कुछ स्तंभों की लिपि को पढ़ा भी गया है।

यहां मंदिर और सती स्तंभ के संबंध में गनेश सिंह ठाकुर बताते है कि प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक – धार्मिक महत्व के साथ प्रभावी ऊर्जा से भरपूर यह स्थान पूर्वज नारायण सिंह से संबंधित है जिनके देवलोकगमन के बाद उनकी पत्नी (गायत्री देवी) सती हुई।

स्तंभ के लेख से भी जानकारी मिलती है। उक्त स्तंभ में अंकित अस्त्र शस्त्र, घोड़ा, वेशभूषा को देखकर राजवंश की परिपाटी झलकती है। मंदिर के बाजू में प्राचीन शिव मंदिर है।पहले किले की सीमा की दीवार के चिन्ह भी स्पष्ट दिखाई देते है प्राचीन डबरा में हमेशा पानी रहता है, वर्षो पहले यहां मेला लगता था परंतु हमारे दादा बाबू सिंह के देहावसान के बाद लोगों का आना जाना रुक गया। आज भी कुछ लोग पूजन के लिए पहुंचते है, और पिछले 6 वर्षों से संक्रांति के समय मेला लगना शुरू हो गया है।

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