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लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ कहे जाने वाले पत्रकारों को कुचलना बन्द करें शासन-प्रशासन- हुलास साहू

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भारत सम्मान के सम्पादक जितेंद्र कुमार जयसवाल को तत्काल निःशर्त रिहा करें सरकार- धर्मेन्द्र बैरागी

रिपोर्ट-सुरेन्द्र जैन

छत्तीसगढ़ ग्राम विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष हुलास साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कुछ दिनों से भ्रष्टाचार और जनहित मुद्दों को अपने चैनल न्यूज के माध्यम से जनता के सामने सच्चाई लाने और शासन-प्रशासन को इन जनहित मुद्दों की ओर ध्यानाकर्षित करने का प्रयास करने वाले भारत सम्मान के संपादक जितेंद्र कुमार को पुलिस प्रशासन द्वारा गिरफ्तार करने की प्रक्रिया का हम पुरजोर विरोध करते हैं और कड़े शब्दों में आपत्ति करते हैं। इस तरह लोकतंत्र के चौंथे स्तम्भ को कुचलना बंद करें शासन-प्रशासन।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार पत्रकारों के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव कर रही है। लगातार पत्रकारों का दमन हो रहा है। जनहित मुद्दे सामने लाकर शासन-प्रशासन को आइना दिखाने वाले पत्रकारों को कीड़ा-मकोड़ा समझ रही है। छत्तीसगढ़ की सरकार देश की सबसे ज्यादा अलोकतांत्रिक सरकारों में से एक है। नहीं तो भला बताइए किसी लोकतांत्रिक राज्य में ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाए और उसके परिवार को जानकारी तक न दिया जाए। मीडिया को भी गुमराह किया जा रहा है। गिरफ्तारी होने से भी इंकार किया जा रहा है। क्या यह जो सब हुआ है, वह अलोकतांत्रिक, गैरसंविधानिक और अमानवीय नहीं है ?

छत्तीसगढ़ ग्राम विकास संघर्ष समिति के सलाहकार एवं छत्तीसगढ़ किसान महासभा के संयोजक नरोत्तम शर्मा नरोत्तम शर्मा ने कहा कि पत्रकार की गिरफ्तारी सीधे अभिब्यक्ति की आजादी पर हमला है, लोकतांत्रिक देश में यह घोर निंदनीय है। भारत सम्मान के संपादक जितेन्द्र कुमार को तुरन्त रिहा करो और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों को हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराई जाए। दोषियों को कठोर सजा दी जाए। गलत ढंग तथा बदले की भावना से पद का दुरुपयोग करनेवाले पुलिस अधिकारियों को तत्काल पद से बर्खास्त कर गिरफ्तार करो।

छत्तीसगढ़ ग्राम विकास संघर्ष समिति के सचिव धर्मेन्द्र बैरागी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सरकार बताए कि क्या आपका प्रदेश चलाने का यही तरीका है ? क्या यही नवा छत्तीसगढ़ मॉडल कि चर्चा आप देशभर में करते हैं ? क्या इस कार्रवाई को आप लोकतांत्रिक कहते हैं ? क्या यह किसी व्यक्ति, पत्रकार के संवैधानिक अधिकारों का हनन नहीं है ? अगर आपका यही तरीका है तो यह गलत है और इसकी कीमत आपको चुकानी पड़ेगी। किसी भी व्यक्ति, पत्रकार के साथ ऐसा बर्ताव करने की इजाजत संविधान आपको नहीं देता। मैं आपके इस तानाशाही रवैये के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराता हूं और सरकार में करता हूँ कि भारत सम्मान के सम्पादक जितेंद्र कुमार जयसवाल को तत्काल निःशर्त रिहा करें सरकार।

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