–सड़कों पर घुमते दिखाई दे रहे आवारा मवेशी
देवेश पाण्डेय सिलवानी रायसेन
सड़क पर गौवंश, राहगीर परेशान, कार्रवाई करे कौन। सड़क पर विचरण करने वाले आवारा मवेशियों की वजह से इन दिनों सर्वाधिक सड़क हादसे हो रहे हैं। हादसे का शिकार केवल वे ही नहीं हो रहे जो इनसे टकरा जाते हैं, बल्कि इसकी जद में बेजुबान जानवर भी आ रहे हैं। हर हाइवे पर 10 से 15 किमी के अंतराल पर मृत पड़े गौवंश आसानी से मिल जाएंगे। इसके लिए जिम्मेदार क्या सिर्फ वाहन चालक हैं, नहीं इसके लिए पूरी तरह से वे पशु मालिक जिम्मेदार हैं, जिनका इन बेजुबान जानवरों से नाता सिर्फ दूध दोहने तक का होता है। काम निकलने के बाद वे इन मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं और यह मवेशी सड़क पर अपना ठिकाना ढूंढते हैं।
गत दिनों आवारा विचरण करने वाले पशुओं के मालिकों के खिलाफ कलेक्टर अरविंद दुबे ने सख्ती दिखाई थी। उन्होंने सड़कों पर घूमने वाले पशुओं को गौशाला भेजने के निर्देश दिए। साथ ही पशुओं के सींगों में रेडियम लगाने के भी निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि पशुओं के कारण सड़क दुर्घटना होने पर, जिन पशुओं पर टैग लगा है, ऐसे पशुपालकों का पता कर उन पर एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही की जाए। लेकिन लगभग एक माह व्यतीत हो जाने के बाद भी कलेक्टर के आदेशों का पालन नहीं किया गया। न तो पशुओं के सींगों पर रेडियम ही लग सके और न ही उन्हें गौशाला छोड़ने की कवायद शुरू हो सकी। नतीजा यह हुआ कि हाल ही में बाड़ी रोड पर किसी अज्ञात वाहन ने करीब 13 गौवंश को बुरी तरह से रौंद दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। दूध दोहने तक का नाता रखने वाले ऐसे पशु पालकों पर कार्रवाई होना बेहद जरूरी है।
नपा ने तैनात किए कर्मचारी
नगर पंचायत द्वारा आवारा विचरण करने वाले पशुओं को सड़क से हटाने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। साथ ही आदेश जारी कर सख्त हिदायत भी दी गई है कि कार्य में लापरवाही की गई तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी से निजात पाना मुमकिन नहीं है।लेकिन क्या इससे समस्या का हल निकल पाएगा। इधर कर्मचारी इन आवारा मवेशियों को सड़क से हटाते हैं, और थोड़ी देर बाद वे फिर अपना डेरा वहीं जमा लेते हैं। इसके लिए जरूरी है कि इन आवारा मवेशियों के पालकों पर तो कार्रवाई हो ही साथ ही इन पशुओं को गौशाला भेजने की कवायद भी की जाए, और भारी जुर्माने के साथ इन्हें वापस पशु मालिकों के सुपुर्द किया जाए।