दीपक कांकर रायसेन
भूसीबेटा बीट में नदी किनारे मिला बाघ का शव; चिल्वाहा में 15 दिन पहले हुए हमले से जोड़कर देख रहे लोग
घायल बाघ होने की आशंका की आधिकारिक पुष्टि नहीं
रायसेन। जिले के ओबेदुल्लागंज वन मंडल क्षेत्र में एक बार फिर बाघ की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। चिल्वाहा रेंज की भूसीबेटा बीट में नदी के पास बाघ का शव मिलने की सूचना से वन क्षेत्र में हलचल मच गई है। एक महीने के भीतर दूसरे बाघ की मौत की घटना ने वन्यजीवों की सुरक्षा और वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
15 दिन पहले व्यक्ति पर हुआ था हमला, अब बाघ की मौत से जुड़ रहीं कड़ियां
स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 15 दिन पहले चिल्वाहा क्षेत्र में एक व्यक्ति पर बाघ के हमले की घटना सामने आई थी। उस समय वन विभाग की ओर से हमलावर वन्यजीव को बाघ के बजाय लकड़बग्घा बताया गया था। अब नदी के पास बाघ का शव मिलने के बाद क्षेत्र में यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं यह वही घायल बाघ तो नहीं, जो पहले हमले की घटना से जुड़ा था।
हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच संबंध होने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसकी पुष्टि के लिए बाघ की पहचान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल की जांच अहम होगी।
एक महीने में दूसरी मौत, वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल
ओबेदुल्लागंज वन मंडल क्षेत्र में कम समय के भीतर बाघ की दूसरी संदिग्ध मौत की सूचना ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बाघ की मौत किन परिस्थितियों में हुई, क्या वह किसी बीमारी, चोट, करंट या अन्य कारण से मरा और घटना के पीछे कोई मानवीय गतिविधि जिम्मेदार है—इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
वन विभाग की भूमिका पर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय लोगों के बीच मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि पहले हमले की घटना और अब बाघ की मौत के बीच संबंध हो सकता है। वहीं, वन विभाग पर मामले की जानकारी सार्वजनिक करने और जांच की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, मामले को दबाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी हैं: बाघ की मौत का वास्तविक कारण क्या है? क्या करीब 15 दिन पहले हुई घटना की दोबारा समीक्षा होगी? क्या वन विभाग दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध की जांच करेगा? और क्या पोस्टमार्टम व अन्य जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे?
फिलहाल, बाघ की मौत का वास्तविक कारण और पहले हमले से उसका संबंध जांच के विषय हैं। वन विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
सांकेतिक फोटो