दीवानगंज के गुफा मंदिर के नीचे की घटना; एक माह से कर रहा था अजीबोगरीब हरकतें, पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंपा
मुकेश साहू दीवानगंज रायसेन
सांची विकासखंड के अंतर्गत ग्राम दीवानगंज में एक व्यक्ति ने अपने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान कालूराम पिता परमानंद अहिरवार उम्र करीब 50 वर्ष, निवासी दीवानगंज के रूप में हुई है। आत्महत्या के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार कालूराम गुफा मंदिर के नीचे अपने घर में रहता था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पिछले करीब एक माह से उसके व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा था। वह कभी हाथ में कुल्हाड़ी लेकर पहाड़ी पर चला जाता था तो कभी वापस नीचे आ जाता था। बताया जा रहा है कि करीब चार-पांच दिन पहले उसने अपनी पत्नी और गोद लिए बेटे को भी घर से बाहर भेज दिया था। इसी दौरान रविवार-सोमवार की दरमियानी रात कालूराम ने घर में बिजली की डोरी का फंदा बनाकर अपनी जान दे दी।

घटना की सूचना मिलते ही दीवानगंज चौकी प्रभारी सुनील शर्मा, एएसआई रामकिशोर उइके और संदीप रघुवंशी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल की बारीकी से जांच-पड़ताल की और शव को नीचे उतरवाकर पंचनामा कार्रवाई की। परिजनों के बयान दर्ज करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आत्महत्या के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
पोस्टमार्टम के लिए 31 किमी दूर जाना पड़ा, फिर उठी मर्चुरी की मांग
इस घटना ने एक बार फिर दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम सुविधा और मर्चुरी रूम नहीं होने का मुद्दा सामने ला दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि दीवानगंज क्षेत्र में लंबे समय से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मर्चुरी रूम और पोस्टमार्टम की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।

दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के आसपास करीब 35 से 40 गांव आते हैं। इसके अलावा क्षेत्र से भोपाल-विदिशा हाईवे 18, रेलवे लाइन और रेलवे स्टेशन भी गुजरते हैं। ग्रामीणों के अनुसार हाईवे और रेलवे क्षेत्र होने के कारण यहां आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। हादसों में मौत होने पर शवों का पोस्टमार्टम कराने के लिए परिजनों को करीब 31 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि शव को पोस्टमार्टम के लिए दूर ले जाने में परिजनों को समय और आर्थिक नुकसान दोनों उठाना पड़ते हैं। कई बार दुख की घड़ी में परिवार के लोगों को शव लेकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में दीवानगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम की सुविधा और मर्चुरी रूम बनाया जाना बेहद जरूरी है।
ग्रामीणों ने कहा अब तो प्रशासन को गंभीरता से लेना चाहिए
ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि दीवानगंज की भौगोलिक स्थिति और आसपास के 35-40 गांवों की आबादी को देखते हुए यहां मर्चुरी रूम और पोस्टमार्टम सुविधा जल्द शुरू की जाए, ताकि दुर्घटना या अन्य अप्राकृतिक मौत के मामलों में मृतकों के परिजनों को शव लेकर 31 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल न जाना पड़े।